नेलांग से कैलास तक… फिर जागी आस्था की राह, सीमा से उठी सनातन की सबसे बड़ी मांग

उत्तरकाशी
रिपोर्ट : महावीर सिंह राणा
उत्तराखंड की पवित्र धरती उत्तरकाशी से एक ऐसी आवाज़ उठी है, जो आने वाले समय में देश की सबसे बड़ी धार्मिक और सामरिक मांग बन सकती है। भारत-चीन सीमा पर स्थित ऐतिहासिक नेलांग घाटी में साधु-संतों, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े लोगों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने “कैलास मुक्त यात्रा” निकालकर नेलांग-जादूंग-कैलास मानसरोवर मार्ग को खोलने का ऐतिहासिक संकल्प लिया।
करीब साढ़े 11 हजार फीट की ऊंचाई पर शिव-पार्वती चोटी की तलहटी में गंगा पूजन और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच साधु-संतों ने प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से नेलांग-कैलास मानसरोवर कॉरिडोर बनाने की मांग उठाई। यह प्रस्ताव राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को भेजा जाएगा।
यह केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि सनातन आस्था, सीमांत विकास और राष्ट्रीय स्वाभिमान से जुड़ा अभियान बनता जा रहा है।

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साध्वी रेणुका गुरुमां ने कहा कि पौराणिक काल में साधु-संत गंगोत्री से नेलांग, जादूंग और झेलूखागा मार्ग होते हुए कैलास मानसरोवर तक पहुंचते थे। तिब्बत पर चीन के कब्जे के बाद यह मार्ग बंद हो गया। अब समय आ गया है कि भारत अपनी इस प्राचीन आध्यात्मिक धरोहर को पुनर्जीवित करे।
उन्होंने कहा कि अन्य मार्गों की तुलना में नेलांग मार्ग अधिक सुगम और ऐतिहासिक है। यदि यह कॉरिडोर खुलता है तो न केवल श्रद्धालुओं की यात्रा आसान होगी, बल्कि सीमांत क्षेत्र में पर्यटन, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई उड़ान मिलेगी।


स्थानीय लोगों का मानना है कि यह कॉरिडोर उत्तरकाशी और सीमांत गांवों की तस्वीर बदल सकता है। होटल व्यवसाय, होमस्टे, ट्रांसपोर्ट, हस्तशिल्प और स्थानीय व्यापार को बड़ा लाभ मिलेगा। वर्षों से पलायन झेल रहे गांवों में फिर से रौनक लौट सकती है।

भारत-चीन सीमा के संवेदनशील इलाके में इस तरह का धार्मिक और सामरिक कॉरिडोर देश की सुरक्षा और सीमांत उपस्थिति को भी मजबूत करेगा। यही वजह है कि इस अभियान को अब राष्ट्रीय स्तर पर समर्थन मिलने लगा है।
यात्रा के दौरान काशी विश्वनाथ मंदिर में जलाभिषेक, गंगोत्री धाम दर्शन और नेलांग घाटी में विशेष पूजा-अर्चना की गई। इस मौके पर भाजपा जिलाध्यक्ष नागेंद्र चौहान, अनिल मोंगा, प्रमोद, वीरेंद्र रावत, राधेश्याम, गिरीश साहू, मनोज शर्मा, नितिन गोयल, शिव शंकर, संतोष सहित बड़ी संख्या में साधु-संत और स्वयंसेवक मौजूद रहे।

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