उत्तरकाशी
रिपोर्ट — महावीर सिंह राणा,
विश्व प्रसिद्ध गंगोत्री धाम हिंदू धर्म के सबसे पवित्र धामों में से एक माना जाता है। हजारों वर्षों से श्रद्धालु यहां आकर मां गंगा के दर्शन के साथ-साथ अपने पितरों के मोक्ष एवं उत्थान के लिए धार्मिक अनुष्ठान करते रहे हैं। गंगोत्री धाम की यात्रा अपने आप में श्रद्धा, आस्था और आध्यात्मिक सुख का प्रतीक मानी जाती है।
लेकिन विडंबना यह है कि आज उसी गंगोत्री धाम के घाट बदहाल स्थिति में पहुंच चुके हैं। जिन घाटों पर पितरों के तर्पण और धार्मिक कर्मकांड किए जाते हैं, उनकी हालत लगातार खराब होती जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले वर्षों में आई आपदा के कारण कई घाट क्षतिग्रस्त हो गए थे और आज तक उनका स्थायी पुनर्निर्माण नहीं हो पाया है।
स्थानीय लोगों के अनुसार बरसात के मौसम में भागीरथी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ता है, जिससे घाटों के आसपास कटाव का खतरा और अधिक बढ़ जाता है। लोगों ने आशंका जताई है कि यदि समय रहते सुरक्षा कार्य और मजबूत निर्माण नहीं किया गया तो आने वाले मानसून में भारी नुकसान हो सकता है।
गंगोत्री धाम में तीर्थ पुरोहितों और स्थानीय व्यापारियों ने प्रशासन से घाटों के पुनर्निर्माण और सुरक्षा कार्य जल्द शुरू करने की मांग की है। उनका कहना है कि चारधाम यात्रा के दौरान प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं, ऐसे में घाटों की खराब स्थिति श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा बन सकती है।
संजीब सेमवाल अध्यक्ष गंगा सभा गंगोत्री धाम
ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि गंगोत्री धाम की धार्मिक और ऐतिहासिक गरिमा को देखते हुए घाटों के संरक्षण एवं पुनर्निर्माण के लिए विशेष योजना बनाई जाए, ताकि भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना से बचा जा सके।

