उत्तरकाशी
रिपोर्ट महावीर सिंह राणा
उत्तरकाशी तो देवभूमि के नाम से पहचानी जाती है मगर यहां की बेटियां भी किसी देवी से कम नहीं है जिसमें एक नाम है मधु चौहान जिनको इंटरनेशनल खिलाड़ी, रेफरी, कोच और समाजसेवी के रूप में देशभर में मिला सम्मान, हजारों बेटियों को बना रहीं आत्मनिर्भर

आज के दौर में जहां कुछ लोग अब भी बेटियों को कमजोर समझने की भूल करते हैं, वहीं उत्तरकाशी जनपद के लक्षेश्वर क्षेत्र की बेटी मधु चौहान अपनी मेहनत, संघर्ष और उपलब्धियों से समाज की ऐसी सोच को करारा जवाब दे रही हैं।
एक साधारण परिवार से निकलकर मधु चौहान ने यह साबित कर दिया कि अगर बेटियों को अवसर और परिवार का साथ मिले तो वे सिर्फ घर ही नहीं, बल्कि पूरे राज्य और देश का नाम रोशन कर सकती हैं।

मधु चौहान वर्तमान में आत्मरक्षा (सेल्फ डिफेंस) के क्षेत्र में लगातार कार्य कर रही हैं। वह एक इंटरनेशनल खिलाड़ी होने के साथ-साथ इंटरनेशनल रेफरी और कोच के रूप में भी अपनी पहचान बना चुकी हैं। खेल जगत में उनके शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें गोल्ड मेडल, सिल्वर मेडल सहित कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।

हाल ही में उन्हें 8वीं WAKO इंटरनेशनल किकबॉक्सिंग रेफरी सेमिनार 2026 में “जज/रेफरी (Tatami Sports)” की उपाधि से सम्मानित किया गया। यह सम्मान किसी भी खिलाड़ी और प्रशिक्षक के लिए बेहद गौरव की बात मानी जाती है।
यही नहीं, समाज और खेल के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए मधु चौहान को डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम इंस्पिरेशनल ऑफ ह्यूमैनिटी अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है। यह सम्मान उन्हें मानवता, खेल और शिक्षा के क्षेत्र में प्रेरणादायक कार्यों के लिए प्रदान किया गया।
इसके अलावा उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी सेवा रत्न सम्मान से भी नवाजा गया, जो उनके खेल, कोचिंग और समाजसेवा के क्षेत्र में निरंतर योगदान का प्रमाण है।

मधु चौहान ने अपने आत्मरक्षा अभियान की शुरुआत सबसे पहले अपने गढ़वाल और उत्तरकाशी से की। आज तक वह जनपद के 6 ब्लॉकों में लगभग 2000 बच्चों को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दे चुकी हैं। आज के समय में देहरादून में भी कई स्कूलों में प्रशिक्षण देती है
उनका उद्देश्य केवल लड़कियों को आत्मरक्षा सिखाना नहीं, बल्कि उनमें आत्मविश्वास, साहस और सुरक्षा की भावना जागृत करना है।
मधु चौहान का मानना है कि—
“जब युवा खुद की रक्षा करना सीखते हैं, तभी समाज मजबूत और सुरक्षित बनता है।”
उनकी यह सोच आज हजारों बेटियों के लिए प्रेरणा बन चुकी है। स्थानीय लोग, अभिभावक और जनप्रतिनिधि भी मधु चौहान के कार्यों की खुले दिल से सराहना करते हैं। गांव-गांव में बेटियों को उनके जैसा बनने की सीख दी जा रही है।

आज जब समाज में कन्या भ्रूण हत्या जैसी सोच अब भी कहीं न कहीं मौजूद है, तब मधु चौहान जैसी बेटियां उन मानसिकताओं पर एक मजबूत तमाचा हैं। जिस बेटी को कभी बोझ समझा जाता था, वही बेटी आज उत्तरकाशी और उत्तराखंड का गौरव बनकर उभर रही है।
मधु चौहान की कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस हौसले, संघर्ष और आत्मविश्वास की कहानी है जो हर बेटी के अंदर छिपी शक्ति को पहचान दिलाती है।
अगर बेटियों को अवसर मिले, तो वे इतिहास भी लिख सकती हैं और समाज की सोच भी बदल सकती हैं। उसका कहना है कि अगर मन साफ हो और आत्मा परमात्मा दोनों साथ है तो आप निश्चित ही मंजिल को पार कर सकते हो
हौसला बुलंद रखिए कामयाबी जरूर मिलेगी लोगों की मत सुनिए जिंदगी फिर नहीं मिलेगी संकल्प से शिखर तक उत्तराखंड से विदेश तक यही सोच रखें अपनी
उनका उद्देश्य केवल लड़कियों को आत्मरक्षा सिखाना नहीं, बल्कि उनमें आत्मविश्वास, साहस और सुरक्षा की भावना जागृत करना है।

मधु चौहान का मानना है कि—
“जब युवा खुद की रक्षा करना सीखते हैं, तभी समाज मजबूत और सुरक्षित बनता है।”
उनकी यह सोच आज हजारों बेटियों के लिए प्रेरणा बन चुकी है। स्थानीय लोग, अभिभावक और जनप्रतिनिधि भी मधु चौहान के कार्यों की खुले दिल से सराहना करते हैं। गांव-गांव में बेटियों को उनके जैसा बनने की सीख दी जा रही है।
आज जब समाज में कन्या भ्रूण हत्या जैसी सोच अब भी कहीं न कहीं मौजूद है, तब मधु चौहान जैसी बेटियां उन मानसिकताओं पर एक मजबूत तमाचा हैं। जिस बेटी को कभी बोझ समझा जाता था, वही बेटी आज उत्तरकाशी और उत्तराखंड का गौरव बनकर उभर रही है।
मधु चौहान की कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस हौसले, संघर्ष और आत्मविश्वास की कहानी है जो हर बेटी के अंदर छिपी शक्ति को पहचान दिलाती है।
अगर बेटियों को अवसर मिले, तो वे इतिहास भी लिख सकती हैं और समाज की सोच भी बदल सकती हैं। उसका कहना है कि अगर मन साफ हो और आत्मा परमात्मा दोनों साथ है तो आप निश्चित ही मंजिल को पार कर सकते हो
हौसला बुलंद रखिए कामयाबी जरूर मिलेगी लोगों की मत सुनिए जिंदगी फिर नहीं मिलेगी संकल्प से शिखर तक उत्तराखंड से विदेश तक यही सोच रखें अपनी


