उत्तरकाशी
रिपोर्ट महावीर सिंह राणा
चारधाम यात्रा के दौरान उत्तरकाशी से गंगोत्री तक का करीब 80 किलोमीटर लंबा राष्ट्रीय राजमार्ग इन दिनों यात्रियों के लिए बड़ी मुसीबत बनता जा रहा है। संकरे रास्ते, भारी वाहनों का दबाव और घंटों लगने वाले जाम ने स्थानीय लोगों, पुरोहितों और यात्रियों की परेशानी बढ़ा दी है। अब लोगों ने केंद्र और राज्य सरकार से इस मार्ग के चौड़ीकरण की जोरदार मांग उठाई है।
उत्तरकाशी से गंगोत्री धाम तक जाने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग आज भी कई जगहों पर बेहद संकरा बना हुआ है। चारधाम यात्रा शुरू होते ही इस मार्ग पर हजारों वाहन दौड़ते हैं, लेकिन सड़क की चौड़ाई कम होने के कारण आए दिन लंबा जाम लग जाता है। स्थिति ऐसी हो जाती है कि श्रद्धालुओं को घंटों सड़क पर फंसे रहना पड़ता है।
स्थानीय लोगों और गंगोत्री के पुरोहितों का कहना है कि जब गंगोत्री से लेकर गंगासागर तक भाजपा की सरकार है, तो अब इस महत्वपूर्ण मार्ग का चौड़ीकरण प्राथमिकता के आधार पर होना चाहिए। उनका कहना है कि यह केवल यात्रा का रास्ता नहीं बल्कि सामरिक दृष्टि से भी बेहद अहम मार्ग है, क्योंकि बॉर्डर रोड और सेना की आवाजाही भी इसी रास्ते से होती है।
लोगों का आरोप है कि कई बार शासन और प्रशासन को लिखित और मौखिक रूप से इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। बताया जा रहा है कि पहले इस सड़क के चौड़ीकरण का टेंडर भी जारी हुआ था, लेकिन केवल एक कंपनी द्वारा कम रेट डालने के कारण मामला स्थगित हो गया।
वही बी0आर0ओ0 के कमांडिंग ऑफिसर का कहना है कि उत्तरकाशी से लेकर भैरव घाटी तक रोड की चौड़ीकरण की स्वीकृति मिल चुकी है और तुरंत ही काम शुरू होने की संभावना है जो की उत्तरकाशी जिले के लिए एक खुशी की बात है
वही
स्थानीय जनता का कहना है कि पर्यावरण और इकोसिस्टम की सुरक्षा जरूरी है, लेकिन विकास और सुरक्षा के काम भी रुकने नहीं चाहिए। उनका साफ कहना है कि आधुनिक तकनीक के जरिए पर्यावरण को सुरक्षित रखते हुए सड़क का चौड़ीकरण किया जा सकता है।
चारधाम यात्रा हर साल नए रिकॉर्ड बना रही है, लेकिन सड़क व्यवस्था आज भी पुराने हालात में है। सवाल यह है कि आखिर कब तक श्रद्धालु जाम, खतरे और परेशानियों के बीच यात्रा करने को मजबूर रहेंगे?
अब गंगोत्री घाटी से एक ही आवाज उठ रही है —
“अगर चारधाम यात्रा और सीमाई सुरक्षा दोनों जरूरी हैं, तो उत्तरकाशी से गंगोत्री तक राष्ट्रीय राजमार्ग का चौड़ीकरण भी उतना ही जरूरी है।
अगर समय रहते सरकार ने इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए, तो आने वाले वर्षों में चारधाम यात्रा का बढ़ता दबाव इस मार्ग को और अधिक खतरनाक बना सकता है। अब देखना होगा कि सरकार जनता की इस बड़ी मांग पर कब तक फैसला लेती है।

