गढ़वाल के पांचवें तीर्थ के रूप में विकसित होगा श्री मलूक पीठ आश्रम, बनेगा भव्य श्री लक्ष्मी नरसिंह पंचायतन मंदिर एवं पशु चिकित्सालय

उत्तरकाशी।
रिपोर्टर महावीर सिंह राणा
जनपद उत्तरकाशी स्थित श्री मलूक पीठ आश्रम में एक अत्यंत भव्य एवं दिव्य श्री लक्ष्मी नरसिंह पंचायतन मंदिर का निर्माण प्रस्तावित है, जिसका शिलापूजन 10 मई को परम पूज्य महाराज श्री के करकमलों द्वारा विधिवत वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच संपन्न किया गया।


यह मंदिर केवल एक धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं होगा, बल्कि पूरे गढ़वाल क्षेत्र के लिए आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक विकास का नया आयाम स्थापित करेगा। आश्रम से जुड़े संतों एवं श्रद्धालुओं का मानना है कि भविष्य में यह स्थल गढ़वाल के पांचवें तीर्थ के रूप में अपनी विशेष पहचान बनाएगा।


बताया जा रहा है कि मंदिर का निर्माण अत्यंत भव्य एवं पारंपरिक भारतीय वास्तुकला शैली में किया जाएगा, जिससे यह श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनेगा। मंदिर निर्माण से क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार एवं व्यापार के नए अवसर प्राप्त होंगे।

ये भी पढ़ें:  उत्तरकाशी रिपोर्ट महावीर सिंह राणा विकासखंड भटवाड़ी के ग्राम लोथंरू स्थित प्राचीन भगवान श्री बाणेश्वर महादेव मंदिर परिसर में आयोजित विशेष पूजा-अर्चना एवं पारंपरिक मेले में डुंडा के ब्लॉक प्रमुख राजदीप सिंह परमार शामिल हुए। उन्होंने मंदिर में भगवान श्री बाणेश्वर महादेव के दर्शन कर विधिवत पूजा-अर्चना की और क्षेत्रवासियों की सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य एवं खुशहाली की कामना की। मेले में ब्लॉक प्रमुख ने श्रद्धालुओं, स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों से आत्मीय मुलाकात कर उन्हें शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराएं हमारी अमूल्य धरोहर हैं। ऐसे पारंपरिक धार्मिक मेले आस्था और संस्कृति को मजबूत करने के साथ ही सामाजिक समरसता एवं आपसी भाईचारे को भी बढ़ावा देते हैं। राजदीप सिंह परमार ने कहा कि लोक परंपराओं और धार्मिक आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और विरासत से जोड़ने का महत्वपूर्ण अवसर मिलता है। उन्होंने आयोजन समिति एवं समस्त ग्रामवासियों को सफल आयोजन के लिए बधाई देते हुए भगवान श्री बाणेश्वर महादेव से सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि एवं मंगल की कामना की।


विशेष बात यह है कि धार्मिक एवं आध्यात्मिक गतिविधियों के साथ-साथ यहां पशु चिकित्सालय (पशु अस्पताल) का निर्माण भी प्रस्तावित है। यह पहल क्षेत्र के ग्रामीणों एवं पशुपालकों के लिए बड़ी सौगात मानी जा रही है। पहाड़ी क्षेत्रों में पशुधन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है और सनातन संस्कृति में गौ माता सहित पशुओं की सेवा एवं संरक्षण को विशेष महत्व दिया गया है। ऐसे में पशु चिकित्सालय की स्थापना से पशुपालकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी।
स्थानीय लोगों ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि यह परियोजना उत्तरकाशी के धार्मिक गौरव को नई पहचान देने के साथ-साथ समाज सेवा एवं जनकल्याण का भी उत्कृष्ट उदाहरण बनेगी।
आध्यात्मिक नगरी उत्तरकाशी में बनने जा रहा यह विशाल मंदिर आने वाले समय में श्रद्धा, सेवा और संस्कृति का अद्भुत संगम बनकर उभरेगा।

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