उत्तरकाशी
गंगोत्री न्यूज़ एक्सप्रेस
रिपोर्ट : महावीर सिंह राणा
उत्तराखंड की बेटियां अब सिर्फ घर की चौखट तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का तिरंगा बुलंद कर रही हैं। सीमांत जनपद उत्तरकाशी के मोरी विकासखंड के छोटे से गांव भद्रासु की बेटी महक चौहान ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि पहाड़ की बेटियां अवसर मिलने पर आसमान तक उड़ान भर सकती हैं।

महक चौहान का चयन भारतीय सीनियर महिला रग्बी टीम में हुआ है। अब वह 16–17 मई 2026 को ताशकंद, उज़्बेकिस्तान में आयोजित होने वाली सेंट्रल एंड साउथ एशिया 7s चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। जैसे ही यह खबर उत्तराखंड पहुंची, पूरे प्रदेश में खुशी की लहर दौड़ गई।

यह उपलब्धि सिर्फ महक की नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड की बेटियों के आत्मविश्वास और संघर्ष की जीत मानी जा रही है। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद महक ने अपने सपनों को कभी टूटने नहीं दिया। गांव की पगडंडियों से निकलकर भारतीय टीम तक पहुंचना आसान नहीं था, लेकिन उनकी मेहनत, अनुशासन और जुनून ने हर मुश्किल को छोटा साबित कर दिया।
महक इससे पहले भी अंडर-18 और अंडर-20 भारतीय टीम का हिस्सा रह चुकी हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रॉन्ज मेडल जीतकर पहले ही उत्तराखंड का नाम रोशन किया था, लेकिन अब सीनियर भारतीय टीम में चयन होना उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिना जा रहा है।
आज जब समाज में बेटियों को लेकर कई तरह की बहसें होती हैं, तब महक चौहान जैसी बेटियां उन सभी सोचों को जवाब दे रही हैं जो लड़कियों की क्षमताओं पर सवाल उठाते हैं। खेल के मैदान में उनका संघर्ष यह संदेश देता है कि बेटियां किसी भी क्षेत्र में लड़कों से पीछे नहीं हैं।
भारत की बेटियां आज क्रिकेट से लेकर बॉक्सिंग, कुश्ती, हॉकी और अब रग्बी जैसे कठिन खेलों में भी दुनिया के सामने अपना दम दिखा रही हैं। महक चौहान की कहानी उन हजारों पहाड़ी बेटियों के लिए प्रेरणा है जो संसाधनों की कमी के कारण अपने सपनों को अधूरा छोड़ देती हैं।
उत्तराखंड रग्बी एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष आयुष सैनी, सचिव यशवंत सिंह, अध्यक्ष सूर्यकांत सैनी एवं फिटनेस ट्रेनर आकाश सिंह ने महक चौहान को इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा कि महक ने पूरे उत्तराखंड रग्बी परिवार को गौरवान्वित किया है।
जनपद उत्तरकाशी सहित पूरे प्रदेश के खेल प्रेमियों ने महक को शुभकामनाएं दी हैं और उम्मीद जताई है कि वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर शानदार प्रदर्शन कर देश के लिए पदक जीतेंगी।
विशेष संदेश
महक चौहान की यह सफलता केवल एक खिलाड़ी की जीत नहीं, बल्कि उस बदलते भारत की तस्वीर है जहां बेटियां अब हर क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बना रही हैं।
जरूरत है कि समाज बेटियों को अवसर दे, उनका साथ दे और उनके सपनों को उड़ान दे। क्योंकि—
“बेटियां जब मैदान में उतरती हैं, तब सिर्फ खेल नहीं जीततीं… वो समाज की सोच भी बदल देती हैं।”

