उत्तरकाशी। प्राकृतिक आपदाओं से सेब के बागानों को लगातार हो रहे नुकसान के बीच बागवानों की समस्याओं को लेकर आवाज उठी है। विकासखंड नौगांव-मोरी के कनिष्ठ उप प्रमुख कमलेश रावत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर प्राकृतिक आपदा से नष्ट होने वाले सेब के पेड़ों के लिए उचित मुआवजा और विशेष बीमा व्यवस्था लागू करने की मांग की है।
बर्फबारी, ओलावृष्टि और बारिश से बागवानों को भारी नुकसान
कमलेश रावत ने प्रधानमंत्री को भेजे पत्र में कहा कि उत्तरकाशी के पर्वतीय क्षेत्रों में सेब उत्पादक किसानों को हर वर्ष असमय बर्फबारी, ओलावृष्टि, भूस्खलन और अत्यधिक बारिश जैसी प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ता है। इन आपदाओं में कई बार केवल फल की फसल ही नहीं, बल्कि वर्षों से तैयार किए गए पूरे सेब के पेड़ भी नष्ट हो जाते हैं।
एक पेड़ का नुकसान, कई वर्षों की आय पर असर
उन्होंने कहा कि सेब का पेड़ तैयार करने में किसान को कई वर्षों तक मेहनत और पूंजी लगानी पड़ती है। ऐसे में एक विकसित सेब का पेड़ नष्ट होने का नुकसान केवल एक सीजन की फसल तक सीमित नहीं रहता, बल्कि आने वाले कई वर्षों की संभावित आय भी प्रभावित होती है।
“फलदार पेड़ के नष्ट होने को केवल एक साल की फसल का नुकसान मानना बागवानों के वास्तविक नुकसान का आकलन नहीं है।”
मौजूदा बीमा व्यवस्था पर उठाया सवाल

पत्र में कहा गया है कि वार्षिक फसलों के नुकसान के लिए मुआवजा एवं बीमा व्यवस्था उपलब्ध है, लेकिन सेब जैसे बहुवर्षीय फलदार वृक्षों के पूर्ण या आंशिक रूप से नष्ट होने पर पर्याप्त क्षतिपूर्ति की व्यवस्था की आवश्यकता है।
प्रधानमंत्री के सामने रखीं तीन प्रमुख मांगें
1. वृक्ष क्षतिपूर्ति नीति
प्राकृतिक आपदा में नष्ट होने वाले प्रत्येक सेब के पेड़ के आधार पर न्यायसंगत पेड़वार मुआवजा निर्धारित किया जाए।
2. विशेष बागवानी बीमा योजना
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत फलदार वृक्षों को होने वाले भौतिक नुकसान को विशेष रूप से शामिल किया जाए।
3. पुनरोपण एवं पुनर्वास सहायता
नष्ट हुए बागानों में नए पौधे लगाने, मिट्टी उपचार तथा आवश्यक सामग्री के लिए विशेष राहत पैकेज और सब्सिडी उपलब्ध कराई जाए।
बागवानों की आजीविका सुरक्षित करने की मांग
कमलेश रावत ने कहा कि उत्तरकाशी के पर्वतीय क्षेत्रों में बागवानी हजारों परिवारों की आजीविका का महत्वपूर्ण आधार है। प्राकृतिक आपदाओं से बागानों को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए व्यवस्थित और दीर्घकालिक नीति की आवश्यकता है।
उन्होंने प्रधानमंत्री से मामले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने का आग्रह किया है।

