उत्तरकाशी, उच्च हिमालयी क्षेत्रों में भारी बर्फबारी और बेहद चुनौतीपूर्ण मौसम के बीच ट्रेकिंग एवं पर्वतारोहण अभियानों में गए ट्रेकर्स, पोर्टर्स एवं सपोर्ट स्टाफ की सुरक्षित वापसी के लिए चलाया गया रेस्क्यू अभियान डेढ़ दिन में सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया। विषम भौगोलिक परिस्थितियों के बीच जिला प्रशासन और विभिन्न रेस्क्यू एजेंसियों की तत्परता, बेहतर समन्वय और लगातार निगरानी के चलते कुल 67 सदस्यों को सुरक्षित निचले क्षेत्रों तक पहुंचाया गया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन ने उच्च हिमालयी क्षेत्रों में फंसे सदस्यों की सुरक्षित वापसी को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए रेस्क्यू अभियान को युद्धस्तर पर संचालित किया। खराब मौसम, भारी बर्फबारी और दुर्गम परिस्थितियों के बावजूद प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ, आपदा प्रबंधन एवं अन्य संबंधित एजेंसियों ने आपसी समन्वय के साथ अभियान को अंजाम तक पहुंचाया।
हर्षिल से स्मार्ट कंट्रोल रूम तक जिलाधिकारी की लगातार निगरानी
अभियान के पहले दिन जिलाधिकारी प्रशांत आर्य स्वयं हर्षिल पहुंचे और मौके पर रेस्क्यू अभियान की स्थिति का जायजा लेते हुए टीमों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इसके बाद स्मार्ट कंट्रोल रूम से अभियान की लगातार मॉनिटरिंग की गई।
दूसरे दिन भी जिलाधिकारी ने स्मार्ट कंट्रोल रूम से रेस्क्यू ऑपरेशन की पल-पल की स्थिति पर नजर रखते हुए संबंधित टीमों को त्वरित कार्रवाई और सुरक्षित रेस्क्यू सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। वहीं अपर जिलाधिकारी मुक्ता मिश्र हर्षिल में मौजूद रहकर रेस्क्यू अभियान की सीधी निगरानी करती रहीं।
कालिंदी पास से वासुकी ताल तक 67 सदस्यों की सुरक्षित वापसी
रेस्क्यू अभियान के तहत—
ऑडिन कोल पास से 29 सदस्य
कालिंदी पास से 19 सदस्य
जोगिन–I से 08 सदस्य
सतोपंथ से 08 सदस्य
वासुकी ताल से 03 आर्मी पोर्टर्स
सहित कुल 67 सदस्यों का सुरक्षित रेस्क्यू किया गया।
कई अभियान दल भी सुरक्षित वापसी की ओर
प्रशासन के अनुसार श्रीकंठ एक्सपीडिशन पर गए 18 सदस्यीय एसएसबी दल ने अपना अभियान पूरा करने की इच्छा जताई है। इसके अलावा सुदर्शन पीक के 12 सदस्य, भागीरथी-II (आर्मी) के 20 सदस्य, भागीरथी-II के 09 सदस्य, शिवलिंग के 07 सदस्य तथा 05 सदस्यीय एक अन्य दल स्वयं सुरक्षित वापसी की ओर हैं।
चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में प्रशासन की तत्परता बनी मिसाल
रेस्क्यू अभियान की सफलता ने एक बार फिर साबित किया कि उच्च हिमालयी क्षेत्रों में अचानक उत्पन्न होने वाली विषम परिस्थितियों से निपटने के लिए प्रशासनिक समन्वय, त्वरित निर्णय और मौके पर प्रभावी निगरानी कितनी महत्वपूर्ण है।
जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने कहा कि विषम परिस्थितियों के बावजूद जिला प्रशासन और सभी संबंधित एजेंसियों ने पूरी तत्परता, समन्वय और जिम्मेदारी के साथ कार्य किया। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में शुरू किया गया रेस्क्यू अभियान सुरक्षित रूप से पूरा कर लिया गया है।

