तीन सूत्रीय मांगों को लेकर विकासखंड मुख्यालय में अनिश्चितकालीन धरना, प्रदर्शन, चक्का जाम और आत्मदाह की चेतावनी

उत्तरकाशी
रिपोर्ट: महावीर सिंह राणा,
उत्तरकाशी जनपद के सीमांत विकासखंड भटवाड़ी में वर्षों से लंबित जनसमस्याओं को लेकर लोगों का गुस्सा अब खुलकर सामने आ गया है। विकास संघर्ष समिति, जनप्रतिनिधियों और क्षेत्रवासियों ने तीन सूत्रीय मांगों को लेकर विकासखंड मुख्यालय में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं की तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। उनका कहना है कि आवश्यकता पड़ने पर नेशनल हाईवे जाम करने जैसे कदम भी उठाए जाएंगे। कुछ प्रदर्शनकारियों ने आत्मदाह तक की चेतावनी भी दी है।

भटवाड़ी के रामलीला मैदान से शुरू हुई विशाल जनआक्रोश रैली तहसील कार्यालय तक पहुंची, जहां प्रदर्शनकारियों ने जोरदार नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन किया। इसके बाद तहसीलदार भटवाड़ी के माध्यम से जिलाधिकारी उत्तरकाशी को ज्ञापन सौंपा गया।
प्रदर्शनकारियों की पहली मांग सीमांत क्षेत्र भटवाड़ी में केंद्रीय विद्यालय की स्थापना है। उनका कहना है कि क्षेत्र के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए लंबे समय से केंद्रीय विद्यालय की आवश्यकता है, लेकिन वर्षों से मांग किए जाने के बावजूद कोई ठोस पहल नहीं हुई।
दूसरी प्रमुख मांग उत्तरकाशी से भैरवघाटी तक ऑल वेदर सड़क निर्माण कार्य को तत्काल शुरू करने की है।

क्षेत्रवासियों का कहना है कि सीमांत क्षेत्र की सुरक्षा, पर्यटन और स्थानीय लोगों की सुविधा के लिए यह सड़क बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन परियोजना अब तक धरातल पर नहीं उतर सकी है।

तीसरी मांग भटवाड़ी ब्लॉक एवं तहसील मुख्यालय में तैनात सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने की है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि अधिकांश अधिकारी समय पर कार्यालय नहीं पहुंचते, जिससे आम जनता को छोटे-छोटे कार्यों के लिए भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता

धरने पर बैठे लोगों ने स्पष्ट कहा कि जब तक उनकी तीनों मांगों पर सरकार की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा। उन्होंने प्रशासन और सरकार से शीघ्र समाधान निकालने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि उनकी अनदेखी की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

फिलहाल भटवाड़ी में शुरू हुआ यह आंदोलन प्रशासन और सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बनता नजर आ रहा है। अब देखना होगा कि प्रदर्शनकारियों की मांगों पर सरकार कब और क्या निर्णय लेती है, या फिर यह आंदोलन आने वाले दिनों में और उग्र रूप लेता है।

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