धर्म के साथ सेवा का संकल्प: सेंज में श्री मलूक पीठ सेवा संस्थान का सामाजिक एवं धार्मिक अभियान

उत्तरकाशी। जनपद उत्तरकाशी के भटवाड़ी विकासखंड अंतर्गत ग्राम सेंज में श्री मलूक पीठ सेवा संस्थान द्वारा धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक सेवा, गौ-संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और तीर्थ यात्रियों की सेवा के क्षेत्र में विभिन्न महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं। संस्थान के अनुसार ये सेवा कार्य श्रीमलूक पीठाधीश्वर एवं श्री अग्रपीठाधीश्वर परम पूज्य स्वामी श्री राजेन्द्रदास देवाचार्य जी महाराज की प्रेरणा से संचालित किए जा रहे हैं।


संत परंपरा से सेवा तक का सफर
संस्थान की ओर से बताया गया कि इसकी आध्यात्मिक परंपरा संत शिरोमणि श्री मलूक दास जी महाराज से जुड़ी है। संस्थान के अनुसार भारत सरकार द्वारा 15 सितंबर को श्री मलूक दास जी महाराज के सम्मान में डाक टिकट जारी किया गया है।
संस्थान का कहना है कि वर्तमान में इस परंपरा का नेतृत्व परम पूज्य श्री राजेन्द्रदास देवाचार्य जी महाराज कर रहे हैं और मां गंगा के प्रति उनकी विशेष आस्था एवं प्रेरणा से उत्तरकाशी क्षेत्र में विभिन्न सेवा गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
बद्री गाय के संरक्षण की पहल


हिमालयी क्षेत्र की दुर्लभ बद्री नस्ल की गायों के संरक्षण एवं संवर्धन को संस्थान की प्रमुख गतिविधियों में शामिल किया गया है। संस्थान के अनुसार भविष्य में गौवंश के लिए समर्पित गौ चिकित्सालय और एंबुलेंस सेवा शुरू करने की योजना है, ताकि बीमार अथवा घायल गौवंश को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।
संस्थान ने क्षेत्रीय पशुपालन विभाग से गौशाला के विधिवत पंजीकरण तथा शासन की गौ-संरक्षण योजनाओं का लाभ दिलाने में सहयोग का अनुरोध भी किया है।

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तीर्थ यात्रियों, संतों और जवानों की निःशुल्क सेवा
संस्थान के मुताबिक पिछले 3-4 वर्षों से प्रतिदिन तीर्थ यात्रियों, पैदल यात्रा करने वाले संतों और श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क भोजन एवं आवास की व्यवस्था की जा रही है।
आपदा के दौरान भी संस्थान द्वारा सेवा कार्य किए जाने का दावा किया गया है। संस्थान के अनुसार ग्राम नलुणा में आपदा के समय जिलाधिकारी के आग्रह पर 3-4 दिनों तक करीब 300 से 400 आपदा प्रभावित लोगों को निःशुल्क भोजन एवं आवास उपलब्ध कराया गया। वहीं ITBP के करीब 40-50 जवानों के लिए लगभग तीन माह तक निःशुल्क आवास और भोजन की व्यवस्था की गई।
गंगा तट पर 600 पौधों का रोपण

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धार्मिक गतिविधियों के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी संस्थान ने अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया है। संस्थान के अनुसार पिछले तीन वर्षों में गंगा तट और आश्रम के ऊपरी क्षेत्र में देवदार, बरगद, पीपल, बेलपत्र, रुद्राक्ष और सेब सहित करीब 600 फलदार एवं छायादार पौधे लगाए गए हैं। इन पौधों के नियमित संरक्षण का भी दावा किया गया है।
गरीब परिवारों की बेटियों के विवाह में सहयोग
आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की कन्याओं के विवाह में सहयोग के लिए भी संस्थान द्वारा योजना संचालित की जा रही है। संस्थान के अनुसार पहले वर्ष 15 कन्याओं तथा वर्तमान वर्ष में 25 कन्याओं को 11 हजार रुपये नकद के साथ वस्त्र और आवश्यक सामग्री प्रदान की गई।
धार्मिक गतिविधियों से पर्यटन को बढ़ावा
आश्रम में समय-समय पर श्रीमद्भागवत कथा, यज्ञ, संत सेवा और क्षेत्रीय देवताओं के आह्वान से जुड़े धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। संस्थान के अनुसार प्रतिदिन सायंकाल संतों और श्रद्धालुओं की उपस्थिति में मां भगवती गंगा की आरती भी की जाती है।
संस्थान का मानना है कि ऐसी धार्मिक गतिविधियों से क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और व्यवसाय को भी गति मिलती है।

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श्री लक्ष्मी नृसिंह पंचायतन धाम की प्रस्तावित योजना
संस्थान की भविष्य की योजनाओं में आश्रम परिसर में श्री लक्ष्मी नृसिंह पंचायतन धाम के भव्य मंदिर के निर्माण के साथ वेद विद्यालय, मानव चिकित्सालय और आधुनिक गौशाला स्थापित करने का प्रस्ताव शामिल है।
संस्थान के अनुसार इन परियोजनाओं के माध्यम से धार्मिक गतिविधियों के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, गौ-संरक्षण और सामाजिक सेवा को एक ही परिसर से आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
धर्म, सेवा और संरक्षण को एक मंच पर लाने की पहल
ग्राम सेंज स्थित श्री मलूक पीठ सेवा संस्थान की गतिविधियों में धार्मिक आस्था के साथ गौ-संरक्षण, पर्यावरण, आपदा सेवा, तीर्थ यात्री सेवा और सामाजिक सहयोग को एक साथ जोड़ने का प्रयास दिखाई देता है। आने वाले समय में प्रस्तावित मंदिर, वेद विद्यालय, चिकित्सालय और आधुनिक गौशाला जैसी योजनाएं धरातल पर उतरती हैं तो इससे क्षेत्र में धार्मिक एवं सामाजिक गतिविधियों का विस्तार होने की संभावना है।

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