सड़क से आश्रम तक… बद्री गायों को मिला संरक्षण का सहारा

उत्तरकाशी। रिपोर्ट महावीर सिंह राणा
गाय को भारतीय परंपरा में सदियों से श्रद्धा और आस्था का प्रतीक माना जाता रहा है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी गाय का दूध, गोबर और गोमूत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लेकिन दूसरी ओर सड़कों पर बेसहारा घूमते पशु एक बड़ी चुनौती बने हुए हैं। ऐसे में उत्तरकाशी जिले के भटवाड़ी क्षेत्र से सामने आई एक पहल पशु संरक्षण की दिशा में नई उम्मीद जगाती है।

भटवाड़ी ब्लॉक क्षेत्र ss सैंज में स्थित श्री पहाड़ी बाबा भक्ति माली जी के आश्रम में बद्री गायों के संरक्षण और सेवा का कार्य किया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों से लाई गई गायों की यहां देखभाल की जाती है और उनके रहने, खाने तथा स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखा जा रहा है।


आश्रम में इस समय करीब 40 से 45 बद्री गायों के होने की जानकारी सामने आई है। आश्रम प्रबंधन के अनुसार आने वाले समय में यह संख्या और बढ़ाने की योजना है।

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सिर्फ संरक्षण नहीं, इलाज की भी तैयारी
पहाड़ी बाबा भक्ति माली जी का कहना है कि गायों के संरक्षण के साथ-साथ घायल और बीमार पशुओं के उपचार की व्यवस्था भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से भविष्य में आश्रम के समीप पशु अस्पताल स्थापित करने की योजना है।
प्रस्तावित व्यवस्था में एंबुलेंस की सुविधा उपलब्ध कराने का भी प्रयास किया जाएगा, ताकि पहाड़ी क्षेत्रों के गांवों में घायल या बीमार पशुओं को समय पर अस्पताल तक पहुंचाया जा सके।

आश्रम प्रबंधन के अनुसार भविष्य की योजना केवल पशु अस्पताल तक सीमित नहीं है। यहां भव्य मंदिर के साथ पशु अस्पताल और आयुर्वेदिक स्कूल जैसी सुविधाएं विकसित करने की भी परिकल्पना की जा रही है।
गाय संरक्षण से रोजगार और पर्यटन को जोड़ने की पहल
पहाड़ों में पशुपालन ग्रामीण जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। यदि पशु चिकित्सा और संरक्षण से जुड़ी सुविधाएं स्थानीय स्तर पर विकसित होती हैं, तो इससे किसानों को राहत मिलने के साथ-साथ रोजगार की संभावनाएं भी पैदा हो सकती हैं।

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आश्रम की ओर से गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग से गुजरने वाले तीर्थयात्रियों की सहायता किए जाने की बात भी कही गई है। यात्रियों के लिए रहने और भोजन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है।
गाय से जुड़े पारंपरिक उपयोगों पर भी जोर
आश्रम से जुड़े चिकित्सकीय पक्ष की ओर से गाय के दूध, गोबर और गोमूत्र के पारंपरिक उपयोगों का उल्लेख किया गया। गोबर से जैविक खाद तैयार करने और गोमूत्र के आयुर्वेदिक उपयोग की परंपरा लंबे समय से ग्रामीण क्षेत्रों में रही है।
डॉ. अमित मंगवानी का कहना है कि गायों का संरक्षण जरूरी है और इसके लिए समाज को आगे आना चाहिए। उनका मानना है कि यदि आश्रम में प्रस्तावित पशु अस्पताल की सुविधा विकसित होती है तो पहाड़ी क्षेत्रों में घायल और बीमार पशुओं के उपचार में स्थानीय लोगों को बड़ी मदद मिल सकती है।
अब नजर भविष्य की योजनाओं पर
पहाड़ों में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की तरह पशु चिकित्सा सेवाएं भी बड़ी चुनौती हैं। ऐसे में यदि पहाड़ी बाबा भक्ति माली आश्रम की प्रस्तावित योजनाएं धरातल पर उतरती हैं, तो इससे पशु संरक्षण, ग्रामीण पशुपालन और स्थानीय स्तर पर रोजगार के क्षेत्र में नई संभावनाएं बन सकती हैं।
फिलहाल बद्री गायों के संरक्षण की यह पहल लगातार आगे बढ़ रही है। आने वाले समय में आश्रम की प्रस्तावित पशु अस्पताल, एंबुलेंस, मंदिर और आयुर्वेदिक स्कूल की योजनाएं किस रूप में आकार लेती हैं, इस पर सभी की नजर रहेगी।

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