अभी तो ये ट्रेलर है, पिक्चर अभी बाकी है — यमुनोत्री विधानसभा की सियासत में दीपक बिजल्वाण का बढ़ता जनाधार इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। क्षेत्र में लगातार जनता के बीच सक्रिय रहने और सुख-दुख में लोगों के साथ खड़े रहने के कारण उनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है।
जिला पंचायत अध्यक्ष का दायित्व संभाल चुके दीपक बिजल्वाण इस बार दोबारा जिला पंचायत सदस्य के रूप जनता के बीच में हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार जनसंपर्क और जरूरतमंदों की मदद को लेकर उनकी सक्रियता उन्हें अन्य दावेदारों से अलग पहचान दे रही है। समर्थकों का दावा है कि उनकी जनसेवा और सरल व्यवहार के कारण गांव-गांव में उन्हें व्यापक समर्थन मिल रहा है।
दीपक बिजल्वाण पहले विधायक चुनाव लड़ने की दावेदारी भी जता चुके हैं। जिसमें कम ही अंतराल से ओ हार चुके थे बाद में उन्होंने कांग्रेस का साथ छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा यमुनोत्री से किस चेहरे पर भरोसा जताती है। हालांकि टिकट का अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व को करना है, लेकिन मौजूदा राजनीतिक समीकरणों में दीपक बिजल्वाण की दावेदारी को मजबूत माना जा रहा है।
यमुनोत्री विधानसभा का राजनीतिक इतिहास भी दिलचस्प रहा है। लंबे समय से यहां निर्दलीय प्रत्याशियों का प्रभाव देखने को मिलता रहा है, जबकि कांग्रेस और भाजपा भी समय-समय पर इस सीट पर जीत दर्ज कर चुकी हैं। ऐसे में इस बार मुकाबला और भी रोचक होने के आसार हैं।
दीपक बिजल्वाण समर्थकों का कहना है कि राजनीति केवल चुनाव के समय जनता के बीच जाने का नाम नहीं, बल्कि हर सुख-दुख में लोगों के साथ खड़े रहने का संकल्प है। यही वजह है कि “दिल से दीपक—जनता के साथ, हर कदम पर” का संदेश क्षेत्र में तेजी से चर्चा में है।
अब निगाहें भाजपा के टिकट पर टिकी हैं। यदि पार्टी उन्हें मैदान में उतारती है, तो यमुनोत्री विधानसभा में मुकाबला बेहद दिलचस्प और कांटे का हो सकता है। फिलहाल इतना तय है कि दीपक बिजल्वाण की बढ़ती लोकप्रियता ने यमुनोत्री की सियासत में नई हलचल जरूर पैदा कर दी है।
यमुनोत्री में दीपक बिजल्वाण की बढ़ती लोकप्रियता, सियासी रेस में बढ़ी दावेदारी

