महिला शक्ति का महाकुंभ: 14 दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग में गूंजी आत्मविश्वास, संस्कार और राष्ट्र निर्माण की स्वर लहरियां

ऊधम सिंह नगर।
रिपोर्ट महावीर सिंह राणा
जब देश के विभिन्न प्रांतों से आई 150 बहनें एक ही ध्येय लेकर एक स्थान पर एकत्रित हुईं, तो वह केवल एक प्रशिक्षण वर्ग नहीं रहा, बल्कि महिला शक्ति, संस्कार, संगठन और राष्ट्रभक्ति का एक जीवंत महाकुंभ बन गया। ऊधम सिंह नगर में आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेविका समिति के 14 दिवसीय अधिकारी प्रशिक्षण वर्ग (ओटीसी) ने महिलाओं की क्षमता, नेतृत्व और आत्मविश्वास का ऐसा परिचय कराया, जिसने हर किसी को प्रेरित किया।
सुबह की पहली किरण के साथ शुरू होने वाला यह प्रशिक्षण अनुशासन, योग, व्यायाम और आत्मरक्षा के अभ्यास से प्रारंभ होता था। दिनभर चलने वाले विभिन्न सत्रों में बहनों को शारीरिक दक्षता, मानसिक विकास, स्वास्थ्य जागरूकता, नेतृत्व क्षमता, संगठन कौशल और राष्ट्र जीवन से जुड़े विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया। आत्मरक्षा के गुर सीखते हुए स्वयंसेविकाओं ने यह संदेश दिया कि आज की नारी केवल अपनी सुरक्षा ही नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में सक्षम है।

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इस प्रशिक्षण वर्ग की सबसे बड़ी विशेषता रही विविधता में एकता। पहाड़ों की बेटियों से लेकर महानगरों की युवतियों तक, सभी ने एक साथ रहकर एक-दूसरे की संस्कृति, भाषा, परंपरा और जीवन शैली को जाना। अलग-अलग प्रांतों से आई बहनों के बीच बना आत्मीय संबंध भारत की सांस्कृतिक एकता का सुंदर उदाहरण बन गया।
प्रशिक्षण वर्ग में बार-बार यह भाव उभरकर सामने आया कि आज की महिला किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से पीछे नहीं है। विज्ञान, सेना, प्रशासन, शिक्षा, राजनीति, खेल और उद्योग जगत में महिलाओं ने अपनी प्रतिभा का परचम लहराया है। यह प्रशिक्षण उसी आत्मविश्वास को और मजबूत करने का माध्यम बना।

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क्या है राष्ट्रीय स्वयंसेविका समिति?
राष्ट्रीय स्वयंसेविका समिति महिलाओं का एक राष्ट्रसेवी एवं सांस्कृतिक संगठन है, जिसकी स्थापना वर्ष 1936 में वंदनीय लक्ष्मीबाई केलकर (मौसीजी) द्वारा महाराष्ट्र के वर्धा में की गई थी। संगठन का उद्देश्य महिलाओं में राष्ट्रभक्ति, सेवा, संस्कार, आत्मनिर्भरता और नेतृत्व क्षमता का विकास करना है। समिति देशभर में प्रशिक्षण वर्ग, सेवा कार्य, सांस्कृतिक कार्यक्रम और समाज जागरण के अनेक अभियान संचालित करती है।

सिर्फ प्रशिक्षण नहीं, जीवन को नई दिशा देने का अभियान
14 दिनों तक चले इस वर्ग में बहनों ने सीखा कि आत्मशक्ति ही सबसे बड़ी शक्ति है। यहां केवल शारीरिक प्रशिक्षण ही नहीं दिया गया, बल्कि सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास, सामाजिक दायित्व और राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की भूमिका को भी गहराई से समझाया गया। प्रशिक्षिकाओं ने बताया कि सशक्त महिला ही सशक्त परिवार, सशक्त समाज और सशक्त राष्ट्र का निर्माण कर सकती है।
समापन अवसर पर स्वयंसेविकाओं के चेहरे पर आत्मविश्वास, उत्साह और राष्ट्रसेवा का संकल्प साफ दिखाई दे रहा था। यह प्रशिक्षण वर्ग केवल 14 दिनों का कार्यक्रम नहीं, बल्कि जीवनभर प्रेरणा देने वाला एक अनुभव बनकर प्रतिभागियों के साथ रहेगा।
संदेश स्पष्ट है— “नारी केवल शक्ति का प्रतीक नहीं, बल्कि समाज परिवर्तन की सबसे बड़ी आधारशिला है। जब महिलाएं जागृत होती हैं, तो राष्ट्र नई ऊंचाइयों को प्राप्त करता है।”

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