उत्तरकाशी। रिपोर्ट: महावीर सिंह राणा हिमालय की ऊंची चोटियों, हरे-भरे विस्तृत बुग्यालों और प्राकृतिक सौंदर्य के बीच बसा दयारा बुग्याल आज उत्तराखंड के प्रमुख पर्यटन स्थलों में अपनी अलग पहचान बना चुका है। समुद्र तल से करीब 11 हजार फीट की ऊंचाई पर फैला दयारा बुग्याल न केवल ट्रैकिंग और प्रकृति प्रेमियों की पहली पसंद बन रहा है, बल्कि यहां की लोक संस्कृति और पारंपरिक उत्सव भी पर्यटकों को अपनी ओर खींच रहे हैं।

इसी अनूठी परंपरा को देश-दुनिया तक पहुंचाने के उद्देश्य से दयारा बुग्याल में 16 और 17 अगस्त को बटर फेस्टिवल का आयोजन किया जा रहा है। दूध, दही, मट्ठा और मक्खन से जुड़ा यह उत्सव पहाड़ की पारंपरिक जीवनशैली, पशुपालन और प्रकृति के साथ ग्रामीणों के गहरे रिश्ते की जीवंत तस्वीर पेश करता है।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि बुग्यालों में पशुपालन के कारण उनके पास दूध-दही और मक्खन की पर्याप्त मात्रा रहती है। इसी को खुशी और उत्सव का हिस्सा बनाते हुए यहां मक्खन की होली खेली जाती है। रंगों की होली की तरह दयारा की यह अनूठी होली अपनी अलग पहचान बना रही है।
परंपरा से पर्यटन तक… दयारा की बदल रही तस्वीर
बटर फेस्टिवल की शुरुआत स्थानीय स्तर पर स्वर्गीय चंदन सिंह राणा जैसे क्षेत्र के प्रतिष्ठित लोगों के प्रयासों से हुई थी। अब इस परंपरा को आगे बढ़ाने और दयारा को पर्यटन के मानचित्र पर नई पहचान दिलाने की जिम्मेदारी मनोज राणा ने संभाली है। स्थानीय स्तर पर नेतृत्व करते हुए उन्होंने क्षेत्र के पर्यटन विकास और बटर फेस्टिवल को व्यापक स्वरूप देने के लिए लगातार प्रयास किए हैं।
दयारा बुग्याल को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने के प्रयासों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, पर्यटन विभाग और शासन-प्रशासन का सहयोग भी महत्वपूर्ण रहा है। समय-समय पर स्थानीय विधायक से लेकर प्रदेश के वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों और नेताओं की मौजूदगी ने इस आयोजन को और पहचान दिलाई है।

प्रकृति, संस्कृति और रोमांच का संगम
दयारा बुग्याल की सबसे बड़ी खूबी यहां के विशाल घास के मैदान, दूर तक फैले बुग्याल, हिमालयी दृश्य और रोमांचक ट्रैकिंग रूट हैं। गर्मियों में जहां यहां की हरियाली पर्यटकों को आकर्षित करती है, वहीं सर्दियों में बर्फ की सफेद चादर दयारा को किसी जन्नत से कम नहीं बनाती।
यही वजह है कि उत्तरकाशी आने वाले पर्यटकों की सूची में दयारा बुग्याल लगातार अपनी जगह मजबूत कर रहा है। ट्रैकिंग, कैंपिंग, प्रकृति दर्शन और स्थानीय संस्कृति को करीब से महसूस करने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से पर्यटक यहां पहुंच रहे हैं।

पर्यटकों के स्वागत को तैयार दयारा
बटर फेस्टिवल के दौरान स्थानीय ग्रामीण पर्यटकों के स्वागत के लिए तैयार हैं। यहां आने वाले लोगों के लिए स्थानीय स्तर पर रहने और भोजन की व्यवस्थाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं। आयोजकों और ग्रामीणों का कहना है कि पर्यटक यहां सिर्फ प्राकृतिक सौंदर्य देखने नहीं, बल्कि पहाड़ की संस्कृति, परंपरा और ग्रामीण जीवन को करीब से अनुभव करने आएं।

दयारा का संदेश साफ है—प्रकृति हमारी पहचान है, पशुपालन हमारी परंपरा है और पर्यटन हमारे भविष्य की नई राह।
अगर आप भी हिमालय की गोद में बसे इस अनूठे बुग्याल की खूबसूरती, पहाड़ की संस्कृति और मक्खन की होली का रोमांच महसूस करना चाहते हैं, तो 16-17 अगस्त का दयारा बटर फेस्टिवल आपके लिए एक यादगार अनुभव बन सकता है।
दयारा बुला रहा है… आइए, प्रकृति के बीच पहाड़ की खुशियों का हिस्सा बनिए!

