हर्षिल घाटी के युवाओं को मिला नया आसमान, ‘वाइब्रेंट विलेज’ पहल से खुलेंगे स्वरोजगार के द्वार

उत्तरकाशी
रिपोर्ट महावीर सिंह राणा
उत्तरकाशी। सीमांत हर्षिल घाटी में युवाओं को पर्यटन, प्रकृति संरक्षण और स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत आयोजित 15 दिवसीय “वाइब्रेंट विलेज नेचुरलिस्ट प्रशिक्षण कार्यक्रम” गुरुवार को उत्साहपूर्ण माहौल में सम्पन्न हो गया। बगोरी गांव स्थित पंचायत भवन में आयोजित समापन समारोह में प्रशिक्षण प्राप्त प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रभागीय वनाधिकारी डी.पी. बलूनी मौजूद रहे, जबकि उत्तराखंड पर्यटन विभाग की अपर निदेशक पूनम चंद विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुईं। प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन उत्तराखंड पर्यटन विभाग एवं पर्यटन और आतिथ्य कौशल परिषद के सहयोग से किया गया।


इस विशेष प्रशिक्षण में हर्षिल घाटी और उत्तरकाशी जनपद के विभिन्न गांवों—मुखवा, बगोरी, धराली, वीरपुर डुंडा, झाला, सुक्की, रणारी, जसपुर, बारसाली और सिंगोट सहित आसपास के क्षेत्रों के 40 युवाओं ने भाग लिया।
15 दिनों तक चले प्रशिक्षण के दौरान युवाओं को केवल कक्षाओं तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि उन्हें व्यवहारिक और फील्ड आधारित अनुभव भी दिए गए। प्रतिभागियों को गर्तांग गली और मुखवा ट्रैक का भ्रमण कराया गया, जहां उन्होंने हिमालयी जैव विविधता, स्थानीय संस्कृति, ट्रेकिंग मार्गों, इको-टूरिज्म और जिम्मेदार पर्यटन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।

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प्रशिक्षण में देश-विदेश के विशेषज्ञों ने भी युवाओं को मार्गदर्शन दिया। बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान (BSIP) लखनऊ के वैज्ञानिक डॉ. शेख नवाज अली, एबरडीन यूनिवर्सिटी स्कॉटलैंड की वरिष्ठ व्याख्याता डॉ. लिडिया सैम, कच्छ विश्वविद्यालय गुजरात की प्रोफेसर डॉ. सीमा बी. शर्मा और बीएसआईपी के प्रोजेक्ट एसोसिएट बेंजामिन सी. सैम ने प्रतिभागियों को हिमालयी पारिस्थितिकी, जैव विविधता संरक्षण, आपदा प्रबंधन और सतत पर्यटन जैसे विषयों पर विस्तार से जानकारी दी।
इसके अलावा हर्षिल घाटी के रेंजर आदेश यशवंत चौहान ने भी वन संरक्षण और जिम्मेदार प्रकृति पर्यटन पर विशेष व्याख्यान दिया। कई विशेषज्ञ ऑनलाइन माध्यम से भी कार्यक्रम से जुड़े, जिससे प्रतिभागियों को अंतरराष्ट्रीय अनुभव और व्यापक दृष्टिकोण का लाभ मिला।
कार्यक्रम की एक खास बात यह रही कि इसमें स्थानीय महिलाओं और जनप्रतिनिधियों की भी सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। ग्राम प्रधान बगोरी श्रीमती रंजीता डोगरा समेत स्थानीय ग्रामीणों ने कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
समारोह को संबोधित करते हुए प्रभागीय वनाधिकारी डी.पी. बलूनी ने कहा कि सीमांत क्षेत्रों में इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम युवाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए अवसर तैयार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित युवा भविष्य में उत्तराखंड की पर्यटन पहचान को और मजबूत बनाएंगे।
वहीं अपर निदेशक पूनम चंद ने कहा कि “वाइब्रेंट विलेज” पहल का उद्देश्य सीमांत गांवों को पर्यटन और स्वरोजगार से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि स्थानीय युवाओं की भागीदारी ही इस योजना की सबसे बड़ी सफलता है।
कार्यक्रम का संचालन एवं प्रशिक्षण के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी समर्पित मीडिया सोसाइटी के पंकज शर्मा द्वारा निभाई गई। समापन समारोह में विभागीय अधिकारी, जनप्रतिनिधि, स्थानीय ग्रामीण और प्रशिक्षण से जुड़े कई लोग मौजूद रहे।
हर्षिल घाटी में आयोजित यह पहल न केवल युवाओं को प्रकृति और पर्यटन से जोड़ रही है, बल्कि सीमांत गांवों में रोजगार, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की नई उम्मीद भी जगा रही है

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