उत्तरकाशी, रिपोर्ट महावीर सिंह राणा। स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ माने जाने वाले राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) कर्मचारियों ने अपनी वर्षों से लंबित मांगों को लेकर सोमवार को उत्तरकाशी में आवाज बुलंद की। भारतीय मजदूर संघ के आह्वान पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी संगठन के बैनर तले कर्मचारियों ने प्रदेश अध्यक्ष राम संजीवन नौटियाल की अध्यक्षता में मुख्यालय से जिलाधिकारी कार्यालय तक जुलूस निकालकर प्रदर्शन किया। इसके बाद जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री उत्तराखंड को ज्ञापन भेजकर कर्मचारियों की समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की गई।
कर्मचारियों का कहना है कि वे वर्षों से गांव-गांव और दूरदराज के क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन उनकी अपनी सेवा सुरक्षा और आर्थिक भविष्य से जुड़े सवाल आज भी लंबित हैं। ऐसे में सरकार से अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस और न्यायोचित निर्णय की उम्मीद है।
नियमितीकरण और समान काम के लिए समान वेतन की मांग
ज्ञापन में एनएचएम एवं स्वास्थ्य संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण, समान कार्य के लिए समान वेतन, आउटसोर्स कर्मचारियों को निगम अथवा स्वास्थ्य विभाग में शामिल कर विभागीय स्तर पर वेतन सुनिश्चित करने तथा न्यूनतम मासिक वेतन ₹30,000 किए जाने की मांग प्रमुखता से उठाई गई।
इसके साथ ही कर्मचारियों ने एनएचएम कर्मचारी कल्याण बोर्ड के गठन, श्रम संहिता में स्कीम वर्करों को शामिल करने तथा वर्ष 2004 से पूर्व नियुक्त कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ देने की मांग भी सरकार के सामने रखी।
पुरानी पेंशन को लेकर भी उठी आवाज
ज्ञापन में वर्ष 2004 से पूर्व एनएचएम में कार्यरत रहे कर्मचारियों की पूर्ववर्ती सेवा अवधि को जोड़ते हुए उन्हें पुरानी पेंशन योजना (OPS) का लाभ देने की मांग की गई। कर्मचारियों का कहना है कि वर्षों तक स्वास्थ्य विभाग और एनएचएम की सेवाओं में योगदान देने वाले कर्मचारियों के भविष्य की सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।

सरकार से अब फैसले की उम्मीद
संगठन ने कहा कि एनएचएम कर्मचारी विषम परिस्थितियों में भी स्वास्थ्य सेवाओं को आम जनता तक पहुंचाने में लगातार जुटे हैं। ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने में इन कर्मचारियों का योगदान बेहद महत्वपूर्ण है। इसके बावजूद लंबे समय से लंबित मांगों पर निर्णय न होने से कर्मचारियों में निराशा है।
कर्मचारियों ने सरकार से अपील की कि उनकी मांगों को महज ज्ञापन तक सीमित न रखा जाए, बल्कि संवेदनशीलता के साथ विचार कर समयबद्ध तरीके से समाधान किया जाए, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती देने वाले कर्मचारियों को भी सम्मानजनक सेवा शर्तें और सुरक्षित भविष्य मिल सके।
प्रदर्शन के दौरान राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी संगठन के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में कर्मचारी मौजूद रहे।

