बड़कोट/उत्तरकाशी। वन एवं वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य, मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के प्रभावी प्रयास और दुर्गम हिमालयी क्षेत्रों में वन सुरक्षा के प्रति समर्पण के लिए अपर यमुना वन प्रभाग, बड़कोट में तैनात उप प्रभागीय वनाधिकारी साधुलाल पलियाल को गवर्नर एक्सीलेंस अवार्ड-2026 से सम्मानित किया गया है। वन्यजीव सुरक्षा सप्ताह-2026 के समापन अवसर पर देहरादून स्थित लोक भवन में आयोजित समारोह में उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया।
यह सम्मान न केवल साधुलाल पलियाल की कर्तव्यनिष्ठा और कार्यक्षमता का सम्मान है, बल्कि वन एवं वन्यजीव संरक्षण के लिए विषम परिस्थितियों में जुटे वन विभाग के उन कार्मिकों के योगदान को भी रेखांकित करता है, जो प्राकृतिक संपदा की सुरक्षा के साथ स्थानीय ग्रामीणों की जान-माल की रक्षा के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं।
वन्यजीव संरक्षण से लेकर ग्रामीणों की सुरक्षा तक, कार्यों को मिली पहचान

साधुलाल पलियाल को यह सम्मान वन एवं वन्यजीव संरक्षण, मानव-वन्यजीव संघर्ष के प्रभावी न्यूनीकरण, वन्यजीव रेस्क्यू कार्यों में तत्परता, स्थानीय ग्रामीणों की सुरक्षा तथा संवेदनशील परिस्थितियों में जनसमुदाय के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया गया है।
इसके अतिरिक्त वन कर्मियों को वन्यजीव सुरक्षा एवं रेस्क्यू कार्यों के लिए प्रशिक्षित करने, वन क्षेत्रों में निगरानी मजबूत बनाने और संघर्ष की घटनाओं के दौरान प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित करने में उनकी भूमिका को भी महत्वपूर्ण माना गया है।
राज्यपाल ने प्रदान किया सम्मान, समारोह में मौजूद रहे वरिष्ठ अधिकारी
वन्यजीव सुरक्षा सप्ताह-2026 के समापन पर लोक भवन, देहरादून में आयोजित समारोह में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह ने साधुलाल पलियाल को सम्मानित किया। इस अवसर पर सांसद नरेश बंसल, प्रमुख वन संरक्षक उत्तराखंड कपिल लाल, प्रमुख वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक नीना ग्रेवाल सहित वन विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
दुर्गम हिमालयी क्षेत्रों में वन सुरक्षा की चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी
अपर यमुना वन प्रभाग के दुर्गम एवं उच्च हिमालयी क्षेत्रों में वन और वन्यजीवों की सुरक्षा एक चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी है। ऐसे क्षेत्रों में वन संपदा की निगरानी, वन्यजीवों की सुरक्षा और मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को नियंत्रित करने के लिए सतत निगरानी और विभागीय सक्रियता आवश्यक होती है।
साधुलाल पलियाल वन कर्मियों के साथ नियमित गश्त कर वन क्षेत्रों की निगरानी को प्राथमिकता देते हैं। साथ ही स्थानीय ग्रामीणों के साथ समन्वय स्थापित कर वन्यजीवों और मानव आबादी के बीच संघर्ष की आशंका को कम करने के प्रयास करते हैं।
क्षेत्र में वन्यजीवों के हमले अथवा संघर्ष की घटनाएं सामने आने पर प्रभावित ग्रामीणों को समयबद्ध विभागीय सहायता उपलब्ध कराने, आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने और स्थानीय लोगों के साथ संवाद बनाए रखने में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही है।
जागरूकता और प्रशिक्षण से वन सुरक्षा को मजबूत करने पर जोर
वन एवं वन्यजीव संरक्षण को प्रभावी बनाने के लिए साधुलाल पलियाल द्वारा ग्राम स्तर पर जनजागरूकता गोष्ठियों, विद्यालयों में जागरूकता कार्यक्रमों तथा वनाग्नि नियंत्रण से जुड़ी गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाता रहा है।
वन कर्मियों की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण आयोजित करने के साथ लंबी और छोटी दूरी की गश्त के माध्यम से वन क्षेत्रों की निगरानी पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है।
वन्यजीवों से सामना होने की स्थिति में सावधानियां बरतने, उनके व्यवहार को समझने, रेस्क्यू के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन करने और मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं का प्रभावी ढंग से प्रबंधन करने के संबंध में वन कर्मियों एवं स्थानीय समुदाय को जागरूक करना भी उनके कार्यों का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।
स्थानीय वनस्पतियों और जैव विविधता संरक्षण में भी योगदान
वन संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय वनस्पतियों के संवर्धन और प्राकृतिक पुनर्जनन को बढ़ावा देने के लिए भी साधुलाल पलियाल ने प्रयास किए हैं।
स्थानीय वन प्रजातियों के बीजों का संग्रह, नर्सरी कर्मियों को बीज प्रबंधन एवं पौध उत्पादन का प्रशिक्षण तथा पौधशालाओं में स्थानीय प्रजातियों के पौधे तैयार करने जैसे कार्यों के माध्यम से जैव विविधता संरक्षण को प्रोत्साहित किया गया है।
इन प्रयासों का उद्देश्य स्थानीय पारिस्थितिकी के अनुरूप वनस्पतियों को बढ़ावा देना और क्षेत्र की प्राकृतिक संपदा के संरक्षण को मजबूत करना है।
प्रकृति प्रेम के साथ साहित्य और काव्य रचना में भी रुचि
शासकीय दायित्वों के निर्वहन के साथ साधुलाल पलियाल की प्रकृति, पर्यावरण और वन संरक्षण संबंधी लेखन एवं काव्य रचना में भी विशेष रुचि है। प्रकृति के प्रति उनकी संवेदनशीलता उनके साहित्यिक दृष्टिकोण में भी दिखाई देती है। उनके लिए प्रकृति संरक्षण केवल विभागीय दायित्व नहीं, बल्कि समाज में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का भी माध्यम है।
पालुका गांव और रवांई घाटी में खुशी की लहर
साधुलाल पलियाल को प्रतिष्ठित सम्मान मिलने की खबर से उनके गांव पालुका, उनके मूल क्षेत्र देवराणा घाटी (धारी-कफनौल) और रवांई घाटी में खुशी का माहौल है। मित्रों, रिश्तेदारों और परिवारजनों में इस उपलब्धि को लेकर उत्साह है।
उनकी यह उपलब्धि क्षेत्र के लिए गौरव का विषय मानी जा रही है। दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में प्रकृति और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए समर्पित एक अधिकारी को राज्य स्तर पर सम्मानित किया जाना स्थानीय युवाओं और वन विभाग के कार्मिकों के लिए भी प्रेरणादायक है।
वन वीरों को समर्पित की अपनी उपलब्धि
साधुलाल पलियाल के अनुसार, यह सम्मान केवल उनका व्यक्तिगत सम्मान नहीं है, बल्कि उन सभी वन कर्मियों और वन वीरों को समर्पित है, जो विकट परिस्थितियों में भी वनों और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं।
उनका यह भाव वन विभाग के उन कार्मिकों के योगदान को सामने लाता है, जो दुर्गम जंगलों, कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और वन्यजीवों से जुड़ी चुनौतियों के बीच प्राकृतिक विरासत को सुरक्षित रखने के लिए जुटे रहते हैं।
गवर्नर एक्सीलेंस अवार्ड-2026 से सम्मानित होना साधुलाल पलियाल की कार्यनिष्ठा, नेतृत्व क्षमता और वन एवं वन्यजीव संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता की महत्वपूर्ण पहचान है। यह उपलब्धि इस संदेश को भी मजबूत करती है कि प्रकृति का संरक्षण, जैव विविधता की सुरक्षा और स्थानीय समुदायों के साथ बेहतर समन्वय ही मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व की दिशा में महत्वपूर्ण आधार हैं।
रिपोर्ट: महावीर सिंह राणा | उत्तरकाशी

