उत्तरकाशी
रिपोर्ट महावीर सिंह राणा
उत्तरकाशी। अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर उत्तरकाशी जिले में आशा वर्करों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। वर्षों से उपेक्षा और लंबित मानदेय से नाराज़ आशा वर्करों ने शुक्रवार को जोरदार प्रदर्शन करते हुए अनिश्चितकालीन कार्यबहिष्कार का ऐलान कर दिया।
आशा वर्कर यूनियन बावा काली कमली धर्मशाला परिसर में एकत्र हुई, जहां से सैकड़ों की संख्या में आशा वर्करों ने मेन बाजार होते हुए कलेक्ट्रेट तक विशाल जुलूस निकाला। प्रदर्शन के दौरान सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई।
जुलूस का नेतृत्व एटक के मजदूर नेता महावीर प्रसाद और जिला अध्यक्ष रेखा ने किया। प्रदर्शन में शामिल आशा वर्करों ने साफ चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
मुख्य मांगें क्या हैं?
आशा वर्करों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए
न्यूनतम 21,000 रुपये मासिक वेतन सुनिश्चित किया जाए
पिछले 10 महीनों से लंबित मानदेय का तत्काल भुगतान
सभी श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन 27,000 रुपये तय किया जाए
“2007 से काम, लेकिन सम्मान शून्य”
आशा वर्करों का कहना है कि वे वर्ष 2007 से लगातार ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं दे रही हैं, लेकिन आज तक उन्हें न तो स्थायी दर्जा मिला और न ही समय पर भुगतान।
उन्होंने आरोप लगाया कि जुलाई से लेकर मई तक का मानदेय अब तक नहीं दिया गया, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
सरकार पर गंभीर आरोप
प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार पर मजदूरों की आवाज दबाने का आरोप लगाया और श्रम कानूनों में हो रहे बदलावों पर भी चिंता जताई।
मजदूर नेताओं ने कहा कि
“आशा वर्कर स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ हैं, लेकिन सरकार उन्हें नजरअंदाज कर रही है। अब यह आंदोलन आर-पार की लड़ाई बन चुका है।”

बड़ी संख्या में रही मौजूदगी
इस दौरान रेखा पोटियाल, बीना नेगी, सरिता राणा, अर्चना, कविता, रीना सेमवाल, निर्मला, मीता कंडियाल, पुष्पा चौहान, बीना पंवार, चंद्रकला राणा सहित कई आशा वर्कर मौजूद रहीं।
“उत्तरकाशी में आशाओं का विद्रोह: 10 महीने से वेतन नहीं, अब काम बंद”
“मजदूर दिवस पर फूटा गुस्सा: 21 हजार वेतन की मांग पर आशाओं का आंदोलन”
“स्वास्थ्य व्यवस्था ठप होने की चेतावनी, आशा वर्करों का अनिश्चितकालीन बहिष्कार

