चिन्यालीसौड़/उत्तरकाशी।
रिपोर्ट महावीर सिंह राणा
चारधाम यात्रा के चरम दौर में जहां लाखों श्रद्धालु उत्तरकाशी जनपद से होकर गुजर रहे हैं, वहीं चिन्यालीसौड़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) की बदहाल व्यवस्थाओं ने स्थानीय जनता की चिंता और आक्रोश दोनों बढ़ा दिए हैं। नगर पालिका परिषद चिन्यालीसौड़ के अध्यक्ष मनोज कोहली “श्याम” ने जिलाधिकारी उत्तरकाशी को एक कड़ा पत्र भेजकर स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
पालिका अध्यक्ष ने आरोप लगाया है कि CHC चिन्यालीसौड़ में लंबे समय से एंबुलेंस की अनुपलब्धता, बेड की भारी कमी, प्रबंधन की लापरवाही और स्टाफ के आपसी गतिरोध के कारण मरीजों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग लगातार शिकायतों के बावजूद मौन बना हुआ है।
भीषण सड़क हादसे में घंटों नहीं मिली एंबुलेंस
पालिका अध्यक्ष के अनुसार 12 मई 2026 को हुए एक भीषण कार हादसे में घायल व्यक्ति को समय पर एंबुलेंस सुविधा नहीं मिल सकी। घायल को घंटों तक इंतजार करना पड़ा, जिससे परिजन और स्थानीय लोग आक्रोशित हो उठे। आरोप है कि CHC प्रशासन को कई बार अवगत कराने के बावजूद कोई त्वरित व्यवस्था नहीं की गई।
सबसे गंभीर बात यह है कि यमुनोत्री और धनोल्टी विधानसभा क्षेत्र की लगभग 9 पट्टियों सहित नगर पालिका क्षेत्र की बड़ी आबादी इसी CHC पर निर्भर है। चारधाम यात्रा मार्ग पर स्थित यह स्वास्थ्य केंद्र आपातकालीन दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन यहां मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव बना हुआ है।
सिर्फ 6 बेड, ड्रिप लगाने तक के लिए इंतजार
सूत्रों के अनुसार अस्पताल में केवल 3+3 यानी कुल 6 बेड उपलब्ध हैं। हालत यह है कि कई मरीजों को ड्रिप लगाने तक के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यात्रा सीजन में मरीजों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है, लेकिन संसाधन आज भी पुराने ढर्रे पर ही चल रहे हैं।
इतना ही नहीं, अस्पताल स्टाफ के बीच आपसी तालमेल की कमी और आंतरिक विवादों का असर सीधे मरीजों के उपचार पर पड़ रहा है। जनता का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता अब लोगों की जान पर भारी पड़ने लगी है।
पालिका ने पहले भी दिए थे सुझाव, नहीं हुई कार्रवाई
नगर पालिका अध्यक्ष मनोज कोहली ने पत्र में उल्लेख किया है कि उन्होंने पूर्व में सुझाव दिया था कि यदि 108 सेवा उपलब्ध न हो तो हॉस्पिटल की पेड एंबुलेंस तत्काल मरीजों को रेफर करने हेतु उपलब्ध कराई जाए, जिसका भुगतान परिजन अथवा पालिका स्तर पर किया जा सकता है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने इस पर कोई व्यवस्था विकसित नहीं की।
पालिका का कहना है कि कई बार लिखित और मौखिक रूप से स्वास्थ्य विभाग को समस्याओं से अवगत कराया गया, लेकिन अधिकारियों की ओर से न तो कोई ठोस जवाब मिला और न ही सुधारात्मक कदम उठाए गए। मजबूर होकर अब मामला जिलाधिकारी तक पहुंचाना पड़ा।
“अगर अगली बार एंबुलेंस न मिलने से जान गई तो जिम्मेदार कौन?”
पालिका अध्यक्ष ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा है कि यदि भविष्य में एंबुलेंस के अभाव या स्वास्थ्य सेवाओं की लापरवाही के कारण किसी मरीज की जान जाती है तो जनता का आक्रोश संभालना मुश्किल होगा।
उन्होंने जिलाधिकारी से मांग की है कि—
CHC चिन्यालीसौड़ में 24×7 एंबुलेंस सेवा तत्काल तैनात की जाए।
पर्याप्त बेड, ड्रिप स्टैंड और जरूरी संसाधन उपलब्ध कराए जाएं।
स्टाफ के बीच चल रहे गतिरोध की जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए।
12 मई की घटना की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई हो।
इस पत्र की प्रतिलिपि स्वास्थ्य मंत्री उत्तराखंड सरकार और महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य को भी भेजी गई है।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा सवाल

चारधाम यात्रा के दौरान सरकार जहां स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को मजबूत होने का दावा कर रही है, वहीं चिन्यालीसौड़ जैसे महत्वपूर्ण पड़ाव पर सामने आई ये तस्वीर कई सवाल खड़े कर रही है। आखिर जब स्थानीय जनप्रतिनिधियों की लगातार चेतावनी और लिखित शिकायतों के बाद भी व्यवस्थाएं नहीं सुधर रहीं, तो आम जनता किस पर भरोसा करे?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि पर्वतीय क्षेत्रों में “गोल्डन ऑवर” के भीतर उपचार और एंबुलेंस सुविधा जीवन बचाने की सबसे बड़ी कड़ी होती है। यदि इसी स्तर पर लापरवाही बरती गई तो भविष्य में गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।
स्वास्थ्य केवल सुविधा नहीं, जीवन का आधार है। चारधाम यात्रा और पहाड़ी क्षेत्रों की संवेदनशील परिस्थितियों को देखते हुए सरकार और स्वास्थ्य विभाग को चिन्यालीसौड़ CHC की व्यवस्थाओं पर तत्काल प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि स्थानीय जनता और यात्रियों दोनों को सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।

