तूफ़ान और तेज़ बारिश के बीच हर्षिल घाटी में इतिहास रचा

Niउत्तरकाशी, हर्षिल घाटी
रिपोर्ट
महावीर सिंह राणा
नेचुरलिस्ट प्रशिक्षण का सफल आगाज़, ‘वाइब्रेंट विलेज’ को मिला ज़मीनी विस्तार
लगातार हो रही मूसलाधार बारिश, कड़ाके की ठंड और पहाड़ी तूफ़ान के बीच हर्षिल घाटी में एक ऐसा आयोजन हुआ, जिसने न सिर्फ मौसम की चुनौती को मात दी बल्कि सीमांत क्षेत्र के विकास की नई कहानी भी लिख दी।
हर्षिल घाटी के बगोरी गांव में आयोजित नेचुरलिस्ट प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल शुभारंभ इन विपरीत परिस्थितियों में होना अपने आप में एक मिसाल बन गया है। यह पहली बार है जब इतने कठिन मौसम में इस स्तर का प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संचालित किया गया।
बारिश और तूफ़ान भी नहीं रोक पाए जज़्बा
कार्यक्रम में हर्षिल, झाला, धराली, गंगोत्री और मुखवा जैसे दूरस्थ सीमांत गांवों से 30 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
कई युवा बाइक से जोखिम भरे पहाड़ी रास्तों को पार कर प्रशिक्षण स्थल तक पहुंचे—जो उनके उत्साह, समर्पण और बदलाव की चाह को साफ दर्शाता है।
वाइब्रेंट विलेज’ योजना को मिली नई गति
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि बगोरी ग्राम प्रधान श्रीमती रंजीता धौबरा ने कहा कि
हर्षिल घाटी अब ‘वाइब्रेंट विलेज’ योजना के तहत नए अवसरों का केंद्र बन रही है। ऐसे प्रशिक्षण युवाओं के लिए रोजगार के नए दरवाज़े खोल रहे हैं।”
हर्षिल ग्राम प्रधान श्रीमती सुचित्रा रौतेला ने भी इस पहल को युवाओं के भविष्य से जोड़ते हुए कहा कि इससे स्थानीय युवाओं को पर्यटन क्षेत्र में पहचान बनाने का अवसर मिलेगा।
ऑनलाइन जुड़ी पर्यटन विभाग की अपर निदेशक
उत्तराखंड पर्यटन विभाग की अपर निदेशक श्रीमती पूनम चंद ने ऑनलाइन संबोधन में कहा कि
“स्थानीय नेचर ट्रेल्स की पहचान कर उन्हें पर्यटन से जोड़ना ही इस प्रशिक्षण का मूल उद्देश्य होना चाहिए। हर्षिल क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं।”
प्रधानमंत्री के विज़न को मिल रहा ज़मीनी रूप
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हर्षिल दौरे के दौरान ‘वाइब्रेंट विलेज’ योजना पर विशेष जोर दिया गया था।
यह प्रशिक्षण उसी विज़न को धरातल पर उतारने की दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है।
सरकार और संस्थाओं की संयुक्त पहल
यह कार्यक्रम उत्तराखंड पर्यटन विभाग, उत्तराखंड सरकार और पर्यटन एवं आतिथ्य कौशल परिषद (THSC) के सहयोग से संचालित हो रहा है।
समर्पित मीडिया सोसाइटी, जो THSC की प्रशिक्षण भागीदार संस्था है, कार्यक्रम का संचालन कर रही है।
इस दौरान संस्था के निदेशक पंकज शर्मा और प्रशिक्षक राजीव की सक्रिय भूमिका रही।
कौशल विकास की निरंतरता
करीब दो वर्ष पहले इसी क्षेत्र में गाइड प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया था।
उसमें प्रशिक्षित कई प्रतिभागी इस नेचुरलिस्ट प्रशिक्षण में भी शामिल हैं, जो यह दर्शाता है कि हर्षिल घाटी में पर्यटन आधारित कौशल विकास लगातार आगे बढ़ रहा है।
सिर्फ प्रशिक्षण नहीं, आत्मनिर्भरता की ओर कदम
कठिन मौसम में आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक प्रशिक्षण नहीं, बल्कि सीमांत क्षेत्र के युवाओं के लिए आत्मनिर्भरता, रोजगार और नए अवसरों की मजबूत नींव बन रहा है।
हर्षिल घाटी अब सिर्फ प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि नए भारत के उभरते “वाइब्रेंट विलेज मॉडल” के रूप में भी पहचान बना रही है।

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