उत्तरकाशी।
रिपोर्ट महावीर सिंह राणा
उत्तराखंड सरकार द्वारा VB-GRAM-G योजना के तहत ग्राम प्रधानों की ऑनलाइन उपस्थिति (हाजिरी) अनिवार्य किए जाने के निर्णय का पर्वतीय क्षेत्रों में तीखा विरोध शुरू हो गया है। इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क की भारी समस्या से जूझ रहे उत्तरकाशी जनपद के विकासखंड डुंडा के प्रधानों ने इस व्यवस्था को जमीनी हकीकत से बिल्कुल अलग बताते हुए सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
रविवार को प्रधान संगठन, विकासखंड डुंडा की बैठक ब्लॉक अध्यक्ष विनोद पडियार की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि पर्वतीय क्षेत्रों में इंटरनेट और तकनीकी संसाधनों की कमी के कारण ऑनलाइन हाजिरी की व्यवस्था व्यवहारिक नहीं है। इसके विरोध में संगठन ने खंड विकास अधिकारी (BDO) डुंडा को ज्ञापन सौंपकर तत्काल ऑनलाइन हाजिरी व्यवस्था समाप्त कर पुरानी ऑफलाइन (रजिस्टर आधारित) व्यवस्था लागू करने की मांग की।

“ऑनलाइन हाजिरी से विकास कार्य हो रहे प्रभावित”
प्रधानों का कहना है कि कई गांवों में आज भी मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में रोजाना ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराना संभव नहीं हो पा रहा है। इसका सीधा असर ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों पर पड़ रहा है और ग्रामीणों को भी अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

ज्ञापन में कहा गया है कि सरकार का यह निर्णय मैदानों में तो लागू हो सकता है, लेकिन दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों की परिस्थितियों को देखते हुए यह पूरी तरह अव्यावहारिक है।
सरकार को चेतावनी, 2027 चुनाव बहिष्कार की घोषणा
प्रधान संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो विकासखंड डुंडा के सभी 103 ग्राम प्रधान आगामी 2027 विधानसभा चुनाव के बहिष्कार का निर्णय लेने को बाध्य होंगे। संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि आंदोलन को ब्लॉक स्तर से बढ़ाकर जिला और राज्य स्तर तक ले जाया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
सरकार से की यह प्रमुख मांग
प्रधान संगठन ने शासन से मांग की है कि पर्वतीय क्षेत्रों की वास्तविक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए VB-GRAM-G योजना के अंतर्गत ऑनलाइन उपस्थिति की बाध्यता तत्काल समाप्त कर ऑफलाइन (रजिस्टर आधारित) व्यवस्था बहाल की जाए, ताकि ग्राम पंचायतों के विकास कार्य बिना किसी तकनीकी बाधा के सुचारु रूप से संचालित हो सकें।
गंगोत्री न्यूज़ एक्सप्रेस की पड़ताल
सरकार डिजिटल इंडिया और ई-गवर्नेंस को बढ़ावा दे रही है, लेकिन सवाल यह है कि जहां आज भी इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क नहीं पहुंचा, वहां ऑनलाइन व्यवस्था लागू करना कितना व्यावहारिक है? उत्तरकाशी जैसे पर्वतीय जिलों में कई गांव आज भी नेटवर्क की समस्या से जूझ रहे हैं। ऐसे में ग्राम प्रधानों का यह विरोध केवल तकनीकी व्यवस्था का नहीं, बल्कि पहाड़ की जमीनी हकीकत को सामने रखने की कोशिश भी माना जा रहा है।

