डायरिया से बचाव और स्तनपान के प्रति जागरूकता पर जोर, जिला महिला चिकित्सालय में आयोजित हुआ विशेष कार्यक्रम

उत्तरकाशी
रिपोर्ट महावीर सिंह राणा
उत्तरकाशी। डायरिया नियंत्रण पखवाड़ा एवं विश्व स्तनपान सप्ताह के अवसर पर शनिवार को जिला महिला चिकित्सालय, उत्तरकाशी में जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रमुख अधीक्षक डॉ. बी. एस. रावत ने की। कार्यक्रम में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने डायरिया से बचाव, ओआरएस और जिंक के महत्व तथा नवजात शिशुओं के लिए मां के दूध की उपयोगिता पर विस्तार से जानकारी दी।
कार्यक्रम का संचालन जिला कार्यक्रम प्रबंधक (एनएचएम) हरदेव राणा ने किया। उन्होंने बताया कि डायरिया विशेष रूप से 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों के लिए गंभीर एवं जानलेवा बीमारी साबित हो सकती है। समय पर उपचार और सही जानकारी से इस पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।


अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. शैलेंद्र बिजल्वाण ने डायरिया के कारण, रोकथाम और उपचार की जानकारी देते हुए कहा कि दस्त होने पर बच्चों को तुरंत ओआरएस घोल और जिंक की गोलियां देना बेहद आवश्यक है। उन्होंने बताया कि यदि किसी दूरस्थ क्षेत्र में ओआरएस उपलब्ध न हो तो घरेलू घोल का उपयोग किया जा सकता है, लेकिन यदि बच्चे की स्थिति में सुधार न हो या गंभीर लक्षण दिखाई दें तो बिना देर किए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।

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विश्व स्तनपान सप्ताह के तहत डॉ. हिमाद्रि रौंकली ने गर्भवती एवं धात्री माताओं को संबोधित करते हुए कहा कि जन्म के तुरंत बाद नवजात को मां का पहला पीला गाढ़ा दूध (कोलोस्ट्रम) अवश्य पिलाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मां का दूध शिशु के लिए सर्वोत्तम, सुरक्षित और संपूर्ण आहार है, जो उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है। इस दौरान माताओं को स्तनपान की सही विधि और आवश्यक सावधानियों की भी जानकारी दी गई।
प्रमुख अधीक्षक डॉ. बी. एस. रावत ने बताया कि 1 अगस्त से 30 सितंबर 2026 तक डायरिया नियंत्रण अभियान के तहत आशा कार्यकत्रियां और स्वास्थ्य कर्मी घर-घर जाकर लोगों को ओआरएस एवं जिंक के सही उपयोग के प्रति जागरूक करेंगे तथा आवश्यकता अनुसार इनका वितरण भी किया जाएगा। वहीं राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) की टीमें विद्यालयों और आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों को हाथ धोने की सही तकनीक और स्वच्छता की आदतों के बारे में जागरूक करेंगी।

उन्होंने कहा कि विश्व स्तनपान सप्ताह के दौरान आशा कार्यकत्रियां गर्भवती महिलाओं एवं उनके परिवारों को स्तनपान के लाभ, जन्म के तुरंत बाद स्तनपान शुरू कराने और शिशु के समुचित पोषण के बारे में जागरूक करेंगी।
स्वास्थ्य विभाग ने आमजन से अपील की कि बच्चों में दस्त होने पर समय पर ओआरएस एवं जिंक का उपयोग करें, स्वच्छता और हाथ धोने की आदत अपनाएं तथा आवश्यकता पड़ने पर तुरंत स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें। साथ ही प्रत्येक मां से आग्रह किया गया कि नवजात के स्वस्थ भविष्य के लिए जन्म के तुरंत बाद स्तनपान अवश्य प्रारंभ करें।
कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग के मनोज भट्ट, अनिल बिष्ट, राकेश उनियाल, राम संजीवन नौटियाल, हरिशंकर नौटियाल, गिरीश व्यास, रीता चौहान सहित अन्य स्वास्थ्य अधिकारी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे।

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