डुंडा ब्लॉक में टेंडर प्रक्रिया पर घमासान: प्रधान संगठन ने जिलाधिकारी से लगाई गुहार, “एक ही सप्लायर से काम ठप होने का खतरा”

उत्तरकाशी
रिपोर्ट: महावीर सिंह राणा
उत्तरकाशी जनपद के विकास खंड डुंडा में मनरेगा योजनाओं की सामग्री आपूर्ति को लेकर प्रस्तावित टेंडर प्रक्रिया अब विवादों के घेरे में आ गई है। प्रधान संगठन का प्रतिनिधि मंडल जिला मुख्यालय पहुंचा और जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए इस प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।
प्रतिनिधि मंडल ने साफ शब्दों में कहा कि पूरे विकास खंड के लिए एक ही व्यापारी को सामग्री आपूर्ति का जिम्मा देना व्यावहारिक नहीं है और इससे योजनाओं के संचालन में गंभीर बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं। दूरस्थ गांवों तक सामग्री पहुंचाने में देरी, बढ़ा हुआ किराया-भाड़ा और सप्लायर की संभावित मनमानी से विकास कार्य प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।

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प्रधानों और क्षेत्र पंचायत सदस्यों ने एक सुर में इस प्रक्रिया का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि विकास खंड प्रशासन उनकी आपत्तियों को नजरअंदाज कर मनमाने ढंग से निर्णय लेने पर आमादा है। उनका कहना है कि एकल सप्लायर व्यवस्था के समर्थन में “ऊपरी स्तर” से आए किसी पत्र का हवाला दिया जा रहा है, जबकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।
“पारदर्शिता चाहिए, एकाधिकार नहीं”
प्रधान संगठन ने अपने ज्ञापन में स्पष्ट किया कि वे पारदर्शिता और गुणवत्ता के पक्षधर हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि न्याय पंचायत स्तर पर कम से कम पांच अलग-अलग विक्रेताओं/आपूर्तिकर्ताओं का पंजीकरण किया जाए, ताकि प्रतिस्पर्धा बनी रहे और किसी एक व्यापारी का एकाधिकार न हो। इससे न केवल योजनाएं सुचारू रूप से चलेंगी, बल्कि गुणवत्ता और लागत दोनों पर नियंत्रण रहेगा।
जिलाधिकारी से सख्त हस्तक्षेप की मांग
प्रतिनिधि मंडल ने जिलाधिकारी से अनुरोध किया कि इस टेंडर प्रक्रिया को तत्काल निरस्त किया जाए और विकास खंड स्तर पर हो रही मनमानी पर अंकुश लगाने हेतु खंड विकास अधिकारी को आवश्यक निर्देश दिए जाएं। उनका कहना है कि यदि समय रहते हस्तक्षेप नहीं हुआ, तो मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं की गति और विश्वसनीयता दोनों प्रभावित हो सकती हैं।
अब निगाहें प्रशासन के फैसले पर
डुंडा ब्लॉक में उठे इस मुद्दे ने स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच टकराव की स्थिति पैदा कर दी है। अब सबकी नजर जिलाधिकारी के निर्णय पर टिकी है—क्या प्रशासन जनभावनाओं के अनुरूप कदम उठाएगा या विवाद और गहराएगा?
यह मामला सिर्फ एक टेंडर प्रक्रिया का नहीं, बल्कि पारदर्शिता, जवाबदेही और ग्रामीण विकास की दिशा तय करने का है

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