दूधगाड़ू की परंपरा से लोकनृत्य तक, मुस्टिकसौड़ में सजा आस्था का रंग

उत्तरकाशी। रिपोर्ट महावीर सिंह राणा बाड़ागड्डी क्षेत्र के मुस्टिकसौड़ में क्षेत्राधिपति श्री हरि महाराज जी के पावन सानिध्य में आयोजित पौराणिक दूधगाड़ू ‘फुलोई थौलू’ मेले में आस्था, लोकसंस्कृति और सामाजिक उत्सव का अद्भुत संगम देखने को मिला। सदियों पुरानी परंपरा से जुड़े इस मेले में हजारों की संख्या में श्रद्धालु और क्षेत्रवासी पहुंचे और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ पारंपरिक आयोजनों का आनंद लिया।

स्थानीय लोगों के अनुसार फुलोई थौलू मेला पीढ़ियों से चली आ रही धार्मिक परंपरा का हिस्सा है, जिसे आज भी लोग पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ निभाते हैं। मेले की प्रमुख विशेषता दूधगाड़ू परंपरा रही, जिसमें श्रद्धालुओं द्वारा कई कुंतल दूध श्री हरि महाराज जी को अर्पित किया गया। उच्च हिमालयी क्षेत्रों से लाए गए देव पुष्पों और परम कमल के फूलों से विशेष पूजा-अर्चना भी की गई।
मेले में रासु तांदी नृत्य ने भी विशेष आकर्षण पैदा किया। पारंपरिक वेशभूषा में महिलाएं और पुरुष एक-दूसरे का हाथ पकड़कर सामूहिक रूप से नृत्य करते नजर आए। ढोल-दमाऊं और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन पर होने वाला यह सामूहिक नृत्य मेले के उत्साह को और बढ़ाता रहा। स्थानीय संस्कृति में रचे-बसे इस नृत्य के माध्यम से ग्रामीणों ने अपनी लोक परंपरा और सामुदायिक एकजुटता की खूबसूरत झलक प्रस्तुत की।

इस अवसर पर ब्लॉक प्रमुख ममता पंवार ने सभी क्षेत्रवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह मेला हमारी धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हरि महाराज और कार्तिक महाराज के नाम से मनाया जाने वाला यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों और परंपराओं से जोड़ने का कार्य करता है। उन्होंने युवाओं से इन परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए आगे आने का आह्वान किया।
गंगोत्री विधानसभा के विधायक सुरेश चौहान ने भी क्षेत्रवासियों को मेले की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ऐसे आयोजन हमारी सदियों पुरानी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि इन परंपराओं को केवल मनाना ही नहीं, बल्कि नई पीढ़ी तक पहुंचाना भी हमारी जिम्मेदारी है।
वहीं ब्लॉक प्रमुख भंडार राजदीप परमार ने मेले में पहुंचकर सभी श्रद्धालुओं और क्षेत्रवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के पारंपरिक मेले सामूहिक आस्था और सामाजिक एकजुटता को मजबूत करते हैं। उन्होंने क्षेत्रवासियों से इस मेले को हर वर्ष और अधिक भव्य एवं श्रद्धापूर्वक मनाने तथा इसकी पौराणिक परंपरा को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
पूर्व विधायक विजयपाल सजवाण ने भी मेले में पहुंचकर श्री हरि महाराज जी, हुणेश्वर भगवान, नागराजा देवता एवं माता खंडद्वारी के दर्शन किए और क्षेत्र की सुख-शांति, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की।
मेले में हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी और पारंपरिक आयोजनों ने मुस्टिकसौड़ को उत्सव के रंग में रंग दिया। धार्मिक अनुष्ठानों के साथ लोकनृत्य और सामूहिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने माहौल को और जीवंत बना दिया।
वही नागेंद्र सिंह चौहान जिला अध्यक्ष भाजपा ने भी इस मेले में शिरकत की है उन्होंने सभी को शुभकामनाएं दी है उन्होंने कहा है कि यहां पर आए हुए सभी लोगों को इसमें लेकर हार्दिक शुभकामनाए दी है

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फुलोई थौलू मेला दरअसल केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा, लोकसंस्कृति और सामाजिक एकता का ऐसा संगम है, जहां देवभूमि की सदियों पुरानी विरासत आज भी जीवंत दिखाई देती है। दूधगाड़ू की श्रद्धा से लेकर सामूहिक लोकनृत्य तक, यह मेला नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का संदेश देता नजर आया।

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