भटवाड़ी के बंद्राणी में परंपरा और आस्था का संगम, फूल्यार मेले में उमड़ा जनसैलाब

उत्तरकाशी
रिपोर्ट महावीर सिंह राणा
भटवाड़ी विकासखंड के पंचगई क्षेत्र स्थित बंद्राणी गांव में सोमवार को पारंपरिक फूल्यार मेले का भव्य आयोजन श्रद्धा और उत्साह के साथ किया गया। मेले में ग्रामीणों ने अपने इष्ट देव समेश्वर देवता की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि, अच्छी फसल और सभी की खुशहाली की कामना की।


मान्यता के अनुसार धान की रोपाई पूरी होने के बाद ग्रामीण ऊंचे हिमालयी क्षेत्रों से विभिन्न प्रकार के सुगंधित एवं दुर्लभ फूल एकत्र कर अपने इष्ट देवता को अर्पित करते हैं। इसके बाद पूरे गांव में पारंपरिक मेले का आयोजन होता है, जिसमें गांव के सभी लोग, विशेष रूप से विवाहिता बेटियां और महिलाएं, अपने मायके पहुंचकर इस सांस्कृतिक पर्व में शामिल होती हैं।

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मेले के दौरान ग्रामीणों ने एक-दूसरे का हाथ थामकर पारंपरिक रासो नृत्य किया और लोकगीतों की मधुर धुनों पर अपनी समृद्ध लोकसंस्कृति को जीवंत किया। वर्षों से चली आ रही यह परंपरा आज भी पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ निभाई जा रही है। यह मेला प्रत्येक वर्ष आषाढ़ मास की 22 गते को आयोजित किया जाता है।
इस अवसर पर समेश्वर देवता के डंगरिया द्वारा आसड़ (देव वाणी) भी लगाया गया। कार्यक्रम में प्रमुख भटवाड़ी तथा ज्येष्ठ प्रमुख भटवाड़ी सहित अनेक जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी ने देवता से क्षेत्र की सुख-शांति, समृद्धि और जनकल्याण की प्रार्थना की।
उत्तराखंड में इन दिनों विभिन्न क्षेत्रों में पारंपरिक फूल्यार मेले शुरू हो चुके हैं। यह पर्व प्रकृति, कृषि और

लोकसंस्कृति के अद्भुत संगम का प्रतीक माना जाता है। जिस प्रकार हरेला पर्व पर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए पौधरोपण किया जाता है, उसी तरह फूल्यार मेला प्रकृति के प्रति आस्था, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

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