रोज़ी-रोटी की तलाश में घर से हजारों किलोमीटर दूर गया एक बेटा, अब ताबूत में लौटकर आया

उत्तराखंड दिनेशपुर
रिपोर्ट महावीर सिंह राणा
उत्तराखंड के दिनेशपुर से एक ऐसी दर्दनाक खबर सामने आई है, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दी हैं। राधाकांतपुर निमाई पाड़ा निवासी 32 वर्षीय गोपाल, जो अपने परिवार के सपनों को पूरा करने के लिए गुजरात के गांधीधाम में काम कर रहा था, अब इस दुनिया में नहीं रहा।
बताया जा रहा है कि ड्यूटी के दौरान अचानक करंट लगने से गोपाल की मौके पर ही मौत हो गई। एक पल में ही जिंदगी खत्म हो गई… और पीछे रह गए अधूरे सपने, बिखरा हुआ परिवार और अनगिनत सवाल।
जब गोपाल का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, तो पूरा दिनेशपुर शोक में डूब गया। हर गली में सन्नाटा था, हर आंख नम थी… और हर दिल यही पूछ रहा था—आखिर इस परिवार का कसूर क्या था?
सबसे ज्यादा दिल तोड़ देने वाली तस्वीर उसके घर की है—जहां उसकी पत्नी बेसुध है, 6 साल का मासूम अपने पिता को ढूंढ रहा है, और 9 महीने का शिशु तो शायद अभी ये भी नहीं समझ पा रहा कि उसके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ चुका है।
गोपाल ही अपने परिवार का इकलौता सहारा था… वही कमाने वाला, वही उम्मीद, वही सपना।
यह सिर्फ एक हादसा नहीं है… यह उन हजारों मजदूरों की कहानी है, जो अपने परिवार की खुशी के लिए हर दिन जोखिम उठाते हैं, दूर-दराज शहरों में काम करते हैं… लेकिन कभी-कभी वापस सिर्फ खबर बनकर लौटते हैं।
स्थानीय विधायक शिव अरोड़ा ने भरोसा दिलाया है कि गुजरात सरकार और फैक्ट्री प्रबंधन से बातचीत जारी है, और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
लेकिन सवाल सिर्फ मुआवजे का नहीं है…
सवाल है सुरक्षा का… सवाल है उन मजदूरों की जिंदगी का, जो दूसरों के सपने बनाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालते हैं।
आज पूरा क्षेत्र यही मांग कर रहा है कि— 👉 इस परिवार को जल्द से जल्द आर्थिक सहायता मिले
👉 बच्चों के भविष्य की जिम्मेदारी सरकार उठाए
👉 और ऐसे हादसों को रोकने के लिए सख्त सुरक्षा नियम लागू किए जाएं
ताकि फिर कोई गोपाल अपने घर का चिराग बनकर नहीं, बल्कि एक खबर बनकर वापस न आए…

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