गाजणा की लोक संस्कृति और पर्यटन को मिलेगी नई पहचान, जलकुर घाटी मेले में उमड़ा उत्साह

धौन्तरी (उत्तरकाशी)।
गाजणा क्षेत्र की समृद्ध लोक संस्कृति, पारंपरिक विरासत और पर्यटन की अपार संभावनाओं को नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से आज पीएम श्री कमला राम नौटियाल राजकीय इंटर कॉलेज, धौन्तरी में आयोजित

जलकुर घाटी सांस्कृतिक एवं पर्यटन विकास मेले में प्रतिभाग किया।

स्वर्गीय कलीराम नौटियाल स्मृति फाउंडेशन की ओर से आयोजित यह मेला केवल सांस्कृतिक आयोजन ही नहीं, बल्कि गाजणा क्षेत्र की पहचान, विरासत और विकास को नई दिशा देने का एक सराहनीय प्रयास है।
मेले का मुख्य उद्देश्य गाजणा की लोक संस्कृति, पारंपरिक रहन-सहन, लोक परंपराओं और पर्यटन स्थलों को व्यापक पहचान दिलाना तथा जन-जागरूकता के माध्यम से क्षेत्र के विकास को गति देना है।
कार्यक्रम में महिला मंगल दलों की टीमों ने पारंपरिक रासू लोकनृत्य की शानदार प्रस्तुतियों से उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की जीवंत झलक पेश की। वहीं विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से अपनी प्रतिभा और लोक संस्कृति के प्रति प्रेम का शानदार प्रदर्शन किया।

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इस अवसर पर राज्य मंत्री एवं संस्कृति, साहित्य एवं कला परिषद की उपाध्यक्ष श्रीमती मधु भट्ट जी, गाजणा मंडल अध्यक्ष श्री राजीव नौटियाल जी, जिला पर्यटन अधिकारी श्री खुशहाल नेगी जी, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती प्रियंका रावत जी, मेला संयोजक श्री प्रजापति नौटियाल जी सहित अनेक जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता एवं क्षेत्र के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
साथ ही पूर्व जिला पंचायत सदस्य श्रीमती सुम्मी राणा जी, ज्येष्ठ प्रमुख प्रतिनिधि श्री अव्वल सिंह राणा जी, मंडल महामंत्री श्री यशवीर पयाल जी, ग्राम प्रधान कोटियाल गांव श्री सुरेन्द्र सिंह पंवार जी, पूर्व जिला नियोजन समिति सदस्य श्री मेघ सिंह राणा जी, भाजपा जिला आईटी सेल संयोजक श्री दीपक नौटियाल जी, क्षेत्र पंचायत सदस्य सीरी श्री फूल सिंह रावत जी, श्री प्रकाश थपलियाल जी, श्री रघुवीर दास जी सहित विभिन्न ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य, महिला मंगल दलों एवं बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी मौजूद रहे।

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निश्चित रूप से ऐसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ-साथ स्थानीय पर्यटन, स्वरोजगार और क्षेत्रीय विकास की संभावनाओं को भी मजबूत आधार प्रदान करते हैं।

गाजणा की संस्कृति को सम्मान, पर्यटन को पहचान और विकास को नई उड़ान — यही है जलकुर घाटी मेले का संदेश।

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