उत्तरकाशी। देवभूमि उत्तरकाशी में पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय विकास के बीच संतुलन का मुद्दा एक बार फिर प्रमुखता से सामने आया है। रविवार को ग्राम सैंज स्थित श्री मलूक पीठ सेवा संस्थान न्यास में धार्मिक एवं जनकल्याणकारी कार्यों को लेकर आयोजित बैठक ने क्षेत्र में विकास कार्यों पर पर्यावरणीय नियमों से पड़ रहे कथित प्रभाव को लेकर व्यापक चर्चा का रूप ले लिया। बैठक में भटवाड़ी ब्लॉक के ग्राम प्रधानों, क्षेत्र पंचायत सदस्यों, जिला पंचायत प्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने स्थानीय हितों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर अपनी बात रखी।
जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि
इको-सेंसिटिव जोन से जुड़े प्रावधानों और पर्यावरणीय आपत्तियों के चलते क्षेत्र में सड़क, धार्मिक एवं अन्य जनोपयोगी निर्माण कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

उनका कहना था कि उत्तरकाशी की भौगोलिक परिस्थितियों और स्थानीय लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिसमें संरक्षण के साथ-साथ क्षेत्र के विकास और स्थानीय लोगों की आजीविका का भी ध्यान रखा जाए।
स्थानीय लोगों की आवाज को भी मिले जगह”

बैठक में वक्ताओं ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण आवश्यक है, लेकिन इसके नाम पर स्थानीय लोगों के विकास और मूलभूत सुविधाओं से जुड़े कार्य प्रभावित नहीं होने चाहिए। जनप्रतिनिधियों ने इको-सेंसिटिव जोन से संबंधित निर्णयों और समितियों में स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों की जानकारी रखने वाले लोगों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिए जाने की मांग उठाई।

वक्ताओं का कहना था कि सड़क निर्माण, संपर्क मार्ग और अन्य आवश्यक परियोजनाओं में बार-बार आपत्तियां आने से स्थानीय लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की वास्तविक परिस्थितियों को समझे बिना लिए गए निर्णयों पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
मंदिर निर्माण पर रोक का मुद्दा भी उठा
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बैठक में श्री लक्ष्मी नृसिंह पंचायतन मंदिर के प्रस्तावित निर्माण का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। वक्ताओं ने कहा कि सैंज में प्रस्तावित मंदिर का निर्माण धार्मिक आस्था के साथ-साथ क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन और स्थानीय रोजगार की संभावनाओं से भी जुड़ा हुआ है।
स्थानीय लोगों के अनुसार मंदिर का निर्माण गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग के समीप प्रस्तावित है और निर्माण को लेकर पर्यावरणीय आपत्तियों की बात सामने आई है। बैठक में प्रशासन से मंदिर निर्माण से संबंधित
सभी नियमों, अनुमति और आपत्तियों की स्थिति स्पष्ट करने तथा संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने की मांग की गई।

वक्ताओं ने कहा कि यदि धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से यह क्षेत्र विकसित होता है तो स्थानीय युवाओं को रोजगार, स्वरोजगार और पर्यटन से जुड़े अवसर मिल सकते हैं।
गौ-संरक्षण केंद्र और गुरुकुल भी प्रस्तावित

बैठक में बद्री गौ-संरक्षण केंद्र, गौ चिकित्सालय एवं गौशाला के साथ-साथ गुरुकुल और धार्मिक पर्यटन से जुड़े प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा गंगोत्री धाम आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए सेवा कार्य तथा आपदा के समय राहत एवं सहायता गतिविधियों को मजबूत करने पर भी विचार-विमर्श किया गया।
जिलाधिकारी से मिलेगा प्रतिनिधिमंडल, आंदोलन की चेतावनी
बैठक में मौजूद जनप्रतिनिधियों ने कहा कि स्थानीय समस्याओं को लेकर शीघ्र ही एक प्रतिनिधिमंडल जिलाधिकारी उत्तरकाशी से मुलाकात करेगा और इको-सेंसिटिव जोन से संबंधित नियमों, आपत्तियों तथा लंबित विकास कार्यों की स्थिति उनके समक्ष रखेगा।
जनप्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि यदि स्थानीय लोगों की समस्याओं और मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले समय में क्षेत्र के जनप्रतिनिधि और स्थानीय लोग
बड़े आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर हो सकते हैं।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और विकास एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। आवश्यकता ऐसी व्यवस्था बनाने की है, जिसमें हिमालयी पर्यावरण की सुरक्षा के साथ स्थानीय लोगों के अधिकार, रोजगार, सड़क, धार्मिक आस्था और विकास की जरूरतों को भी समान महत्व मिले।

