चिन्यालीसौड़ में पेयजल संकट पर पालिका अध्यक्ष का कड़ा रुख, जल संस्थान की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

चिन्यालीसौड़,
चिन्यालीसौड़ नगर क्षेत्र में लगातार गहराते पेयजल संकट को लेकर नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष मनोज कोहली ‘श्याम’ ने जल संस्थान की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। लगातार पत्राचार के बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने पर पालिका अध्यक्ष ने अधीक्षण अभियंता, उत्तराखंड जल संस्थान, वृत्त टिहरी-उत्तरकाशी को पत्र भेजकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

वार्ड नंबर-6 नागणी में निरीक्षण के दौरान मिली अनियमितताएं

पालिका अध्यक्ष के पत्र के अनुसार वार्ड नंबर-6 नागणी में पेयजल व्यवस्था का स्थानीय निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान मुख्य लाइन से पेयजल टैंक तक पहुंचने से पहले अवैध संयोजन किए जाने की बात सामने आई। इसके चलते टैंक में पर्याप्त जल संग्रहण नहीं हो पा रहा है।
वहीं, नगर क्षेत्र की विभिन्न सड़कों पर पेयजल लाइनें क्षतिग्रस्त होने और खुले में लीकेज के कारण पानी की बर्बादी के साथ ही लोगों के लिए दुर्घटना का खतरा भी बना हुआ है।

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विभागीय निगरानी पर भी सवाल

पालिका अध्यक्ष ने पत्र में पेयजल व्यवस्था के अनुरक्षण, वितरण व्यवस्था और अवैध संयोजनों की निगरानी में लापरवाही पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है।
💧 नई पेयजल लाइन को प्राथमिकता देने की मांग
पालिका अध्यक्ष ने चिन्यालीसौड़ से नागणी तक प्रस्तावित नई पेयजल लाइन के कार्य को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाने की मांग की है। साथ ही कंडीसौड़ से नागणी तक पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने और वर्तमान पाइपलाइन को आवश्यकतानुसार दुरुस्त करने की मांग की गई है।

एक सप्ताह में सुधार नहीं तो व्यापक आंदोलन की चेतावनी


पालिका अध्यक्ष मनोज कोहली ‘श्याम’ ने पत्र के माध्यम से स्पष्ट किया है कि यदि एक सप्ताह के भीतर लीकेज बंद कर पेयजल व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया और अवैध कनेक्शनों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो नियमों के तहत कार्रवाई के साथ व्यापक जनआंदोलन किया जाएगा।
उन्होंने संबंधित विभाग से तीन दिन के भीतर की गई कार्रवाई से अवगत कराने को कहा है।
लगातार पेयजल समस्या से जूझ रहे नगर क्षेत्र के लोगों की नजर अब जल संस्थान की कार्रवाई पर है। सवाल यह है कि पालिका अध्यक्ष के पत्र के बाद विभाग धरातल पर कार्रवाई करता है या फिर मामला एक बार फिर पत्राचार तक ही सीमित रह जाता है।

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