जौंराई बुग्याल में गूंजेगा आस्था और लोकसंस्कृति का रंग, 26 अगस्त से भव्य मेले का शुभारंभ

उत्तरकाशी। रिपोर्ट महावीर सिंह राणा उत्तरकाशी की धरती पर आस्था, पौराणिक मान्यताओं और पहाड़ की समृद्ध लोकसंस्कृति का अद्भुत संगम एक बार फिर देखने को मिलेगा। नाल्ड कट्ठूड़ पट्टी क्षेत्र स्याबा में स्थित प्रसिद्ध जोराई बुग्याल मेले का आयोजन इस वर्ष भी भव्य रूप से किया जा रहा है। सदियों पुरानी मान्यताओं से जुड़े इस मेले को लेकर ग्रामीणों और क्षेत्रवासियों में खासा उत्साह है।


पौराणिक मान्यताओं के अनुसार स्कंद पुराण में भी जोराई क्षेत्र का उल्लेख मिलता है। स्थानीय मान्यता है कि जोराई बुग्याल से होकर जाने वाला मार्ग पांडवों की स्वर्गारोहण यात्रा से जुड़ा रहा है। यही वजह है कि इस क्षेत्र को धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व प्राप्त है। स्थानीय लोगों के अनुसार आज भी क्षेत्र में पांडवकालीन मान्यताओं और परंपराओं से जुड़े कई प्रमाण एवं स्थल मौजूद हैं।
पांडव नृत्य और देव परंपराएं होंगी मुख्य आकर्षण


जोराई मेले का सबसे बड़ा आकर्षण पांडव नृत्य होता है। इसके साथ ही स्थानीय देवी-देवताओं की डांगरियों द्वारा पारंपरिक देव अनुष्ठान किए जाते हैं। देव डोलियों के साथ होने वाला पारंपरिक नृत्य और लोक प्रस्तुतियां श्रद्धालुओं के साथ-साथ पर्यटकों के लिए भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहती हैं।

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मेले में स्थानीय लोक संस्कृति की झलक भी देखने को मिलेगी। महिलाओं और पुरुषों द्वारा पारंपरिक नृत्य एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से पहाड़ की प्राचीन परंपराओं को जीवंत किया जाएगा।
दूध-मट्ठा-मक्खन की होली बनेगी खास आकर्षण
इस मेले की एक अनूठी परंपरा दूध, मट्ठा और मक्खन से जुड़ी होली भी है। सावन मास के समापन के बाद आयोजित होने वाले इस आयोजन में ग्रामीण दूध, मट्ठा और मक्खन को केवल उत्सव का हिस्सा नहीं, बल्कि देवता को समर्पित भोग के रूप में भी प्रस्तुत करते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यह परंपरा उनकी संस्कृति, आस्था और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक है। यही अनूठी परंपरा जोराई मेले को अन्य मेलों से अलग पहचान देती है।

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जनप्रतिनिधियों और विभागों की रहेगी सहभागिता
इस वर्ष मेले में गंगोत्री विधायक सुरेश चौहान, जिला पंचायत अध्यक्ष रमेश चौहान, भाजपा जिलाध्यक्ष नागेंद्र चौहान, ब्लॉक प्रमुख भटवाड़ी ममता पवार ब्लॉक प्रमुख राजदीप परमार, पूर्व ब्लॉक प्रमुख चंदन सिंह पंवार सहित क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों की सहभागिता प्रस्तावित है।
मेला समिति के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह राणा ने बताया कि इस बार पर्यटन विभाग की ओर से भी सहयोग दिया जा रहा है। मेले में आने वाले लोगों के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं जुटाई जा रही हैं। पर्यटन विभाग की ओर से स्लीपिंग बैग सहित अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराए जाने की बात कही गई है। वहीं पशुपालन विभाग और स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी मेले के दौरान मौजूद रहने की संभावना है।
बताया जा रहा है कि जिलाधिकारी उत्तरकाशी प्रशांत आर्य भी मेले में शिरकत कर सकते हैं।
26 अगस्त की शाम होगा शुभारंभ
मेले का उद्घाटन 26 अगस्त की शाम श्याम गांव में किया जाएगा। इसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रमों और लोक प्रस्तुतियों का आयोजन होगा। अगले दिन श्रद्धालु और ग्रामीण जोराई बुग्याल की ओर प्रस्थान करेंगे। 27 28 अगस्त को चौरई भूगोल में आयोजित किया जाएगा
जोराई का यह मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि उत्तरकाशी की पौराणिक विरासत, लोक संस्कृति, देव परंपरा और हिमालयी जीवनशैली को करीब से देखने का अवसर भी है। यही कारण है कि हर वर्ष बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और पर्यटक इस मेले से जुड़ते हैं।
अगर आप भी पहाड़ की प्राचीन संस्कृति, देव परंपराओं और पांडवकालीन मान्यताओं को करीब से देखना चाहते हैं, तो जोराई बुग्याल आपका इंतजार कर रहा है। आस्था की इस अनूठी यात्रा में शामिल होकर उत्तरकाशी की लोक विरासत का साक्षी बनिए।
उत्तरकाशी से महावीर सिंह राणा की रिपोर्ट।

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