उत्तरकाशी
उत्तरकाशी के गाज़णा पट्टी के ग्राम गोरसाड़ा से सामने आई यह कहानी सिर्फ एक परिवार की मजबूरी नहीं, बल्कि अपनों को वापस घर लाने के लिए एक बेटी के संघर्ष और समाज की संवेदनशीलता की कहानी है।
पिछले नौ वर्षों से सऊदी अरब में फंसे पिता की घर वापसी के लिए बेटी दीपिका नौटियाल लगातार संघर्ष कर रही हैं। परिवार का दावा है कि सऊदी अरब में एक कंपनी में ड्राइवर की नौकरी के दौरान उनके पिता इंद्रमणि नौटियाल के साथ एक घटना हुई, जिसके बाद उन पर करीब 2 करोड़ 20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। परिवार के मुताबिक, इसी राशि की अदायगी के बाद उनकी स्वदेश वापसी संभव हो पाएगी।
लेकिन एक सामान्य परिवार के लिए इतनी बड़ी रकम जुटाना लगभग नामुमकिन है।
पिता नौ साल से सात समंदर पार हैं और इधर बेटी हर दिन इस उम्मीद में जी रही है कि एक दिन उसके पिता घर की चौखट पर वापस लौटेंगे।
दीपिका नौटियाल ने सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से लोगों से मदद की अपील शुरू की। उनका कहना है कि परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं है कि वह इतनी बड़ी रकम का इंतजाम कर सके। ऐसे में अब उनकी उम्मीद समाज के सहयोग पर टिकी हुई है।
दीपिका की इस पुकार ने उत्तरकाशी के युवाओं के दिल को छू लिया। पटूड़ी और ढुंगलधार क्षेत्र के नवयुवकों ने आगे बढ़कर 33 हजार रुपये की नगद धनराशि देकर इस मुहिम में अपना योगदान दिया।
इन युवाओं का कहना है कि वे देश-विदेश के होटल व्यवसाय और अन्य क्षेत्रों में काम करते हैं। विदेश में रहकर अपनों से दूर रहने का दर्द वे अच्छी तरह समझते हैं। उनका कहना है कि विदेश की धरती पर फंसे किसी व्यक्ति के लिए परिवार और अपनों की याद ही सबसे बड़ा सहारा होती है।
ग्रामीण “हम दीपिका बहन और उनके परिवार की पीड़ा को समझते हैं। हमारी छोटी सी मदद अगर उनके पिता को घर वापस लाने की मुहिम में काम आती है, तो इससे बड़ी खुशी हमारे लिए कुछ नहीं होगी।”

वहीं, मदद मिलने के बाद दीपिका नौटियाल ने सभी युवाओं और सहयोग करने वाले लोगों का दिल से आभार जताया। उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई सिर्फ अपने पिता को वापस लाने की नहीं, बल्कि नौ साल से अधूरे पड़े परिवार को फिर से जोड़ने की है।
दीपिका की अपील—
“मेरे पिता नौ साल से विदेश में हैं। मैं चाहती हूं कि हर कोई अपनी क्षमता के अनुसार इस मुहिम में मेरा साथ दे, ताकि मेरे पिता जल्द से जल्द अपने घर और अपने परिवार के बीच लौट सकें।”
एक तरफ बेटी की आंखों में पिता की घर वापसी का इंतजार है, तो दूसरी तरफ समाज के कुछ संवेदनशील युवाओं ने मदद का हाथ बढ़ाकर यह संदेश दिया है कि मुश्किल वक्त में इंसान की सबसे बड़ी ताकत इंसान ही होता है।
नौ साल का इंतजार लंबा जरूर है, लेकिन अब दीपिका की उम्मीदों को उत्तरकाशी के युवाओं के इस सहयोग से एक नई रोशनी मिली है।
रिपोर्ट—महावीर सिंह राणा
गंगोत्री न्यूज एक्सप्रेस, उत्तरकाशी

