पल्स पोलियो अभियान को लेकर प्रशासन अलर्ट, 28 जून को जिलेभर में पिलाई जाएंगी ‘जिंदगी की दो बूंद’

उत्तरकाशी
रिपोर्ट महावीर सिंह राणा
उत्तरकाशी। पोलियो जैसी गंभीर और स्थायी विकलांगता पैदा करने वाली बीमारी को जड़ से समाप्त करने के लिए उत्तरकाशी जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने कमर कस ली है। आगामी 28 जून को आयोजित होने वाले राष्ट्रीय पल्स पोलियो दिवस को लेकर जिले में व्यापक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। प्रशासन का लक्ष्य है कि जिले का कोई भी बच्चा पोलियो रोधी खुराक से वंचित न रहे।
इसी क्रम में जिलाधिकारी प्रशांत आर्य की अध्यक्षता में सभी प्रभारी चिकित्सा अधिकारियों और विभिन्न विभागों के अधिकारियों की वर्चुअल बैठक आयोजित की गई। बैठक में अभियान की तैयारियों की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि 0 से 5 वर्ष आयु वर्ग के प्रत्येक बच्चे तक पोलियो की खुराक हर हाल में पहुंचनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि पोलियो भले ही आज देश में नियंत्रित हो चुका हो, लेकिन इसकी रोकथाम के लिए निरंतर सतर्कता आवश्यक है। यदि टीकाकरण की श्रृंखला कमजोर पड़ती है तो बीमारी के दोबारा फैलने का खतरा बना रहता है। इसलिए स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ शिक्षा, बाल विकास, पंचायती राज, नगर निकाय और अन्य विभागों को भी अभियान में सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
जिलेभर में 344 बूथ, घर-घर पहुंचेगी टीम
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. बी.एस. रावत ने बताया कि 28 जून को जनपद के सभी पोलियो बूथों पर बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाई जाएगी। इसके बाद 29 और 30 जून को स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर उन बच्चों तक पहुंचेंगी जो किसी कारणवश बूथों तक नहीं पहुंच पाएंगे।
अभियान के लिए जिले में 344 पोलियो बूथ स्थापित किए गए हैं। आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, एएनएम और स्वास्थ्य विभाग की टीमें पहले से ही क्षेत्रवार तैयारियों में जुटी हुई हैं।
आखिर क्यों जरूरी है पल्स पोलियो?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार पोलियो एक वायरल बीमारी है, जो मुख्य रूप से छोटे बच्चों को प्रभावित करती है। यह बीमारी जीवनभर के लिए हाथ-पैरों में लकवा पैदा कर सकती है और कई मामलों में जानलेवा भी साबित हो सकती है। इसका कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन समय पर दी गई पोलियो रोधी खुराक बच्चों को इस बीमारी से सुरक्षित रखने में बेहद प्रभावी है।
यही वजह है कि स्वास्थ्य विभाग बार-बार अभिभावकों से अपील करता है कि बच्चा पहले से टीकाकृत हो या स्वस्थ दिखाई देता हो, फिर भी राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान के दौरान उसे पोलियो की अतिरिक्त खुराक अवश्य दिलाई जाए।
सीएमओ ने किया चिन्यालीसौड़ अस्पताल का औचक निरीक्षण
राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान की तैयारियों के बीच मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. बी.एस. रावत ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चिन्यालीसौड़ का औचक निरीक्षण भी किया। उन्होंने अस्पताल में भर्ती मरीजों से मुलाकात कर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता की जानकारी ली तथा व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. विनोद कुकरेती को आगामी मानसून को देखते हुए विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं को समय रहते स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचाने के लिए आशा और एएनएम कार्यकर्ताओं के माध्यम से व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाए, ताकि खराब मौसम या आपदा जैसी परिस्थितियों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित न हों।

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टीबी मुक्त उत्तराखंड के लक्ष्य पर भी जोर
बैठक और निरीक्षण के दौरान डॉ. रावत ने जिले में चल रहे 100 दिवसीय टीबी उन्मूलन अभियान की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि टीबी मुक्त उत्तराखंड और टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य तभी हासिल किया जा सकता है जब समय पर जांच, उपचार और जनसहभागिता को बढ़ावा दिया जाए।
उन्होंने सभी स्वास्थ्य अधिकारियों और कर्मचारियों से अपील की कि वे राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान और टीबी उन्मूलन कार्यक्रम को मिशन मोड में संचालित करें, ताकि स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ी सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके।
अभिभावकों से अपील
स्वास्थ्य विभाग ने सभी अभिभावकों से अपील की है कि 28 जून को अपने 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को नजदीकी पोलियो बूथ पर ले जाकर पोलियो की खुराक अवश्य पिलाएं। याद रखें, पोलियो से बचाव का सबसे सुरक्षित और प्रभावी उपाय समय पर दी जाने वाली ‘जिंदगी की दो बूंद’ ही है।

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