उत्तरकाशी।
रिपोर्ट महावीर सिंह राणा
जनपद में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग लगातार सक्रिय है। इसी क्रम में विकासखंड डुण्डा के अंतर्गत आयुष्मान आरोग्य मंदिर जडीढुमका एवं जसपूर में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया।

बैठक मुख्य चिकित्सा अधिकारी के दिशा-निर्देशों के तहत जिला कार्यक्रम प्रबंधक, आईईसी/बीसीसी टीम एवं संबंधित कंसलटेंट की मौजूदगी में संपन्न हुई। इसमें एएनएम, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी, आशा फैसिलिटेटर, आशा कार्यकर्त्रियां तथा क्षेत्र की गर्भवती महिलाएं शामिल रहीं।

बैठक के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों के साथ संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए विस्तृत रणनीति पर चर्चा की गई। प्रतिभागियों को संस्थागत प्रसव के चिकित्सीय, आर्थिक और सामाजिक लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
👉 महत्वपूर्ण निर्देश:
आशा कार्यकर्त्रियों को निर्देशित किया गया कि 7 माह या उससे अधिक गर्भावस्था वाली सभी पंजीकृत महिलाओं का बर्थ प्लान अनिवार्य रूप से तैयार किया जाए, ताकि सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित किया जा सके।
👉 इन योजनाओं और सेवाओं पर दिया गया विशेष फोकस:
मातृत्व स्वास्थ्य कार्यक्रम
चार अनिवार्य एएनसी जांच
संस्थागत प्रसव की अनिवार्यता
जननी सुरक्षा योजना
ईजा-बोई शगुन योजना
नियमित टीकाकरण
परिवार नियोजन सेवाएं
अल्ट्रासाउंड कैंपेन
100 दिवसीय टीबी स्क्रीनिंग अभियान
मोतियाबिंद मुक्त ग्राम अभियान
एनसीडी (गैर संचारी रोग) स्क्रीनिंग
योग एवं स्वास्थ्य जागरूकता गतिविधियां
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि इस तरह की बैठकों के माध्यम से न केवल योजनाओं की जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा रहा है, बल्कि आमजन—विशेषकर गर्भवती महिलाओं—तक स्वास्थ्य सेवाओं की सही जानकारी भी पहुंचाई जा रही है।
जनपद में सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा देने और शिशु मृत्यु दर को कम करने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग का यह प्रयास बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता से ग्रामीण क्षेत्रों में भी जागरूकता और सेवाओं की पहुंच लगातार बेहतर हो रही है।

