उत्तरकाशी
ग्राउंड रिपोर्ट: महावीर सिंह राणा
उत्तरकाशी जिले में बंदरों का आतंक अब विकराल रूप लेता जा रहा है। गांव से लेकर शहर तक, हर जगह बंदरों की बढ़ती संख्या आम जनता के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है।
पहले जहां बंदर जंगलों में ही सीमित रहते थे, अब वे जंगलों को छोड़कर शहरों और गांवों में स्थायी रूप से बसने लगे हैं। प्राकृतिक भोजन जैसे फल, फूल और वनस्पतियों को छोड़कर अब ये बंदर पूरी तरह मानव-निर्भर हो गए हैं।
स्थिति यह है कि बंदर अब घरों के अंदर घुसकर खाने-पीने का सामान उठा ले जाते हैं और विरोध करने पर हमला करने से भी नहीं चूकते।

⚠️ बच्चों और महिलाओं पर सबसे ज्यादा खतरा
सबसे चिंताजनक बात यह है कि बंदरों के हमले का सबसे ज्यादा शिकार छोटे बच्चे और महिलाएं हो रहे हैं।
हाल ही में मनेरी कॉलोनी में एक स्कूली बालिका पर अचानक बंदर ने हमला कर दिया, जिससे वह गिर गई और उसके हाथ और घुटनों में गंभीर चोट आई।
स्कूल जाते बच्चों पर बंदरों के हमले लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे अभिभावकों में भय का माहौल है।
🏥 स्वास्थ्य पर बड़ा खतरा
बंदर के काटने या खरोंचने से कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, जिनमें सबसे खतरनाक है:
🦠 रेबीज (Rabies) — जानलेवा बीमारी
🧫 संक्रमण (Infection)
🦷 गहरे घाव और टिशू डैमेज
💉 बंदर काटने पर जरूरी इलाज (बहुत महत्वपूर्ण जानकारी)
अगर बंदर काट ले या खरोंच दे तो तुरंत ये कदम उठाएं:
1. तुरंत घाव धोएं
साबुन और पानी से कम से कम 10–15 मिनट तक धोएं
2. एंटीसेप्टिक लगाएं
जैसे Betadine या Savlon
3. तुरंत अस्पताल जाएं
4. जरूरी इंजेक्शन:
एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV) — 4 से 5 डोज
रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन (RIG) — गंभीर घाव में
टिटनेस इंजेक्शन
👉 इलाज में देरी जानलेवा साबित हो सकती है।
🚨 जनता की मांग
भटवाडी ब्लाक ज्येष्ठ प्रमुख मीरा देवी व ज्येष्ठ प्रमुख प्रतिनिधि कमलेश कुमार का कहना है कि हमने कई बार जंगलात विभाग को लिखित मौखिक दिया है मगर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं है उनका कहना है कि हम फिर से फर्स्ट विभाग के अधिकारियों से बात करेंगे जिससे कि विभाग
बंदरों को पकड़ने और जंगल में छोड़ने की व्यवस्था करे स्थानीय प्रतिनिधियों का कहना है कि
प्रभावित क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाए
स्कूलों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था हो
हेल्पलाइन नंबर जारी किए जाएं
उत्तरकाशी में बंदरों का आतंक अब सिर्फ परेशानी नहीं, बल्कि एक गंभीर जनसुरक्षा संकट बन चुका है। यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या और भयावह रूप ले सकती है।
📞 जंगलात विभाग के फॉरेस्टर पिंगल दास जी का कहना है कि विगत बर्ष में भी हमने मनेरी कॉलोनी में पिंजरा लगाया था जिसमें की 50 बंदरों को चिड़ियापुर में भेजा था
मगर बंदरों की जनसंख्या लगातार बढ़ती जा रही है जो चिंता का विषय है
वही उनका कहना कि स्थानीय प्रतिनिधि अगर हमको पत्र देते हैं तो निश्चित तौर जंगलात विभाग मनेरी कॉलोनी में पिंजरा लगाएगी और बंदरों से निजाद दिलाएंगे उन्होंने माना है कि बंदरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है जिससे वह गंभीरता से ले रहे हैं
अब देखने वाली बात होगी कि आखिर कब कब तक जनता को बंदरों से निजात मिलेगा

