उत्तरकाशी
रिपोर्ट महावीर सिंह राणा
उत्तरकाशी। प्रशासन और जनता के बीच की दूरी तब स्वतः समाप्त हो जाती है, जब संवेदनशीलता और सरलता किसी अधिकारी की पहचान बन जाए। ऐसा ही एक प्रेरणादायक दृश्य मंगलवार को जिला मुख्यालय में देखने को मिला, जब विकासखंड चिन्यालीसौड़ की ग्राम सभा छणद-खालसी के ग्रामीण अपने गांव में बढ़ते भूस्खलन की समस्या को लेकर जिलाधिकारी प्रशांत आर्य से मिलने पहुंचे।

कार्यालय से बाहर निकलते समय जिलाधिकारी ने स्वयं ग्रामीणों को बुलाकर उनकी समस्याएं सुनीं। ग्रामीणों ने गांव में लगातार बढ़ रहे भूस्खलन से उत्पन्न खतरे की जानकारी दी, जिस पर जिलाधिकारी ने गंभीरता दिखाते हुए शीघ्र आवश्यक कार्रवाई और समाधान का भरोसा दिलाया।
इस दौरान एक बुजुर्ग महिला ने गढ़वाली भाषा में अपनी पीड़ा जिलाधिकारी के समक्ष रखी। जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने पूरे धैर्य, सम्मान और आत्मीयता के साथ उनकी बात सुनी। उनकी संवेदनशीलता और सहज व्यवहार से भावुक हुई महिला ने जिलाधिकारी के सिर पर हाथ रखकर उन्हें आशीर्वाद दिया। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए भावुक और प्रेरणादायक बन गया।
ग्रामीणों ने कहा कि आज के समय में जब आम व्यक्ति अपनी बात प्रशासन तक पहुंचाने के लिए संघर्ष करता है, ऐसे में जिलाधिकारी का स्वयं लोगों को बुलाकर उनकी समस्याएं सुनना एक सकारात्मक संदेश देता है। उन्होंने जिलाधिकारी की जनहितकारी सोच और सरल कार्यशैली की सराहना की।
यह घटना केवल एक प्रशासनिक मुलाकात नहीं, बल्कि प्रशासन और जनता के बीच विश्वास, संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आई। जिलाधिकारी प्रशांत आर्य का यह व्यवहार न केवल एक आदर्श अधिकारी की पहचान है, बल्कि समाज के लिए भी यह संदेश है कि पद से बड़ा मानवीयता और जनसेवा का भाव होता है

