गंगोत्री धाम में कावड़ियों के ऊंचे स्वर में बज रहे डीजे. असामाजिक तत्व द्वारा तोडफ़ोड़ पर गंगोत्री धाम के पुरोहितों ने जताई नाराजगी

उत्तरकाशी
रिपोर्टर महावीर सिंह राणा
गंगोत्री धाम के कपाट 22 अक्टूबर 2025 को वैदिक मंत्र के द्वारा बंद कर दिए गए हैं और मां गंगा की उत्सव डोली मुखवा में विराजमान है जहां मां गंगा के दर्शन किए जाते हैं मगर आजकल आने वाली शिवरात्रि के लिए गंगोत्री धाम में कावड़ियों का पहुछना लगातार जारी है मगर उसके बाद वहां पर ऊंचे शोर में डीजे का प्रयोग किया जा रहा है

स्थानीय पुरोहितों के अनुसार श्री गंगोत्री धाम में आजकल मान्यताओं के अनुसार देवी देवता ध्यान मुद्रा में रहते हैं
यहां पर 6 माह नर पूजा और 6 मा देव पूजा होती है:
गंगोत्री धाम के शीतकालीन कपाट बंद होने के बाद वहां डीजे बजाना और कवडे जाना अनुचित है। यह धार्मिक स्थल की पवित्रता और शांति को भंग करने वाला हो सकता है

ये भी पढ़ें:  उत्तराखंड के लिए बारामासी पर्यटन गतिविधियां बेहद जरूरी, हर सीजन में पयर्टन रहे ऑन

 आपको बताते चले कि गंगोत्री धाम के कपाट 22 अक्टूबर 2025 को शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए थे, और अब मां गंगा की पूजा मुखबा गांव में की जा रही है। इस दौरान धाम में किसी भी प्रकार की गतिविधि की अनुमति नहीं होती है, और यह नियमों का उल्लंघन हो सकता है।

आम तौर पर, धार्मिक स्थलों पर शांति और पवित्रता बनाए रखने के लिए नियम बनाए जाते हैं, और उनका उल्लंघन करने पर कार्रवाई की जा सकती है। वही पंच मंदिर समिति के पुरोहितों का कहना है
हमने पूर्व में भी शासन प्रशासन से अनुरोध किया था कि जब मंदिर के कपाट बंद हो जाते हैं तो वहां पर किसी भी प्रकार का धराली के बाद आवागमन बंद हो जाना चाहिए
ऑफ सीज़न के दौरान गंगोत्री धाम में जिस प्रकार की अव्यवस्था और गंदगी देखने को मिल रही है, वह अत्यंत चिंताजनक है। कुछ लोग यहां घूमने और आनंद लेने आते हैं, लेकिन अपने पीछे कूड़ा-कचरा छोड़ जाते हैं, जो धाम की पवित्रता और स्वच्छता दोनों के लिए हानिकारक है।
साथ ही, इस समय होटल बंद रहते हैं, जिससे सुरक्षा भी एक बड़ा विषय बन जाता है। खाली पड़े होटलों और संपत्तियों को नुकसान पहुँचने की आशंका बनी रहती है। यह हम सभी के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

वही सुरेश सेमवाल सचिव गंगोत्री पंच मंदिर समिति ने बताया है कि कावड़ यात्रा एक धार्मिक यात्रा है और हमें इसे किसी भी तरह से कोई आपत्ति नहीं है मगर जो गंगोत्री धाम पहुंच रहे हैं वह किसी तरह की वहां पर गंदगी व तोड़फोड़ ना करें और अपनी यात्रा सुरक्षित करें

शीतकाल के अती शांत समय में गंगोत्री में ऐसी हुड़दंग बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं है आजकल देवता, साधु संत आध्यात्मिक तपस्या में लीन है। जंगलों में जीव जंतु शांत वातावरण में विचरण कर रहे हैं साथ हम लोगों की जो चल अचल संपत्ति है उसको भी क्षति का भय उत्पन्न हो गया है

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *