जंगली जानवरों का आतंक दहशत में ग्रामीण क्षेत्र

उत्तरकाशी
रिपोर्ट महावीर सिंह राणा
उत्तरकाशी जिला पहाड़ी क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान रखता है यहां काण काण में देवी देवताओं के वास देखने को मिलता हैं यहां हिंदू धर्म का आस्था का केंद्र माना जाता है यहां के लोग सच्चे और ईमानदार लोग रहते है हजारों वर्षों से यहां पर लोग अधिकतर कृषि और पशु पालन पर निर्भर करते हैं मगर अब देखने को मिलता है कि लोग गांव से शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर है इसके कई कारण है लोग पूरे साल भर अपने खेतों में मेहनत करके फसलों को उगते हैं मगर जैसी फसल पकने के कगार पर आती है उसी समय जंगली जानवर आकर फसलों को पूरी तरह से तहस-नहस करके चले जाते है जिसके कारण लोगों ने मजबूरी में खेती करना छोड़ दिया है
वही गाय भैंस बैल पर लगातार बाग़ द्वारा प्रत्येक गांव में एक या 2 दिन बाद हमले होते रहते हैं वहीं अगर आजकल की बात करें आजकल फसलों में कोदा झंगोरा चोलाई आलू राजमा निकल रही है जिनके लालच में जंगली जानवर जंगलों को छोड़कर मानव बस्तियां की ओर रुख करने लग गये है भटवाड़ी ब्लॉक की अगर हम बात करेंगे तो आजकल यहां पर भालू और बाग का आतंक फैला हुआ है लोग घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो रखा है लगातार कई गांव में देखने को मिल रहा है शाम होते ही भालू या बाग घरों में पहुंच जाते हैं कई लोगों को तो इसमें अपनी जान गवाने को मजबूर हो गए हैं अभी हाल ही में ओगी गांव में भी एक हादसा देखने को मिला है जिसमें की एक महिला घास पत्ती लेने गांव के नजदीकी क्षेत्र में जा रखी थी तो अचानक भालू दिखा और भालू के डर के करण भागना पड़ा और भगाने के कारण पहाड़ी में गिर गई जिससे की मौके पर उसकी मौत हो गई इस तरह नाल्ड कठुड के कई गांव ऐसे भी हैं जहां अभी भी यहां सबूत मिलते हैं कई लोगों के सर को फाड़ा हुआ है कान आंख कई जगह हमला कर रखा है

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वहीं बीते दिन स्थानीय एक महिला बताती है कि मैं अपने गौशाला में गई थी और मेरे सामने दो भालू भोंकते हुए जा रहे थे दाएं साइड भालू थे और बाएं साइड बाग जो की एक डरावना दृश्य है कामर रोड पर भी दो-दो बाघों ने कई बार दर्शन दे दिया है वही मनेरी कॉलोनी में भी लोगों ने दो-तीन बार बाग के दर्शन कर लिए हैं गनीमत रही कि अभी तक यहां पर किसी पर हमला नहीं हुआ मगर अगर समय रहते ही जंगलात विभाग की आंख कान नहीं खुली तो निश्चित तौर पर बहुत बड़ी अनहोनी हो सकती है

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