आखिर कब जागेगा प्रशासन? हर बारिश में बंद हो जाता है गंगोत्री हाईवे, जान हथेली पर रखकर स्कूल पहुंचे बच्चे

उत्तरकाशी
रिपोर्ट: महावीर सिंह राणा | गंगोत्री न्यूज़ एक्सप्रेस |
उत्तरकाशी जनपद में लगातार हो रही बारिश ने एक बार फिर प्रशासन और संबंधित विभागों की तैयारियों की पोल खोलकर रख दी है। विश्व प्रसिद्ध गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर कई स्थानों पर पहाड़ियों से लगातार पत्थर और मलबा गिरने के कारण मार्ग घंटों बाधित रहा। सुबह नेतला क्षेत्र में भूस्खलन के चलते एक वाहन मलबे में फंस गया। बाद में BRO ने मार्ग तो खोल दिया, लेकिन तब तक आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।


सबसे दर्दनाक तस्वीर उन मासूम स्कूली बच्चों की रही, जिन्हें स्कूल जाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ी। स्कूल बस मार्ग बंद होने के कारण बच्चों तक नहीं पहुंच सकी। मजबूरन बच्चों को पत्थरों और मलबे के बीच पैदल निकलकर दूसरी ओर पहुंचना पड़ा, जहां से निजी टैक्सियों के जरिए उन्हें स्कूल भेजा गया। सवाल यह है कि अगर इस दौरान कोई बड़ा हादसा हो जाता, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेता?

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प्रशासन बार-बार दावा करता है कि हर संवेदनशील स्थान पर जेसीबी और पोकलेन मशीनें तैनात हैं और मार्ग जल्द खोल दिया जाता है। लेकिन वास्तविकता यह है कि हर बारिश के साथ वही पुराने लैंडस्लाइड जोन फिर मुसीबत बन जाते हैं। यदि इन स्थानों का स्थायी उपचार (ट्रीटमेंट) समय रहते किया गया होता, तो आज लोगों को इतनी कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ता।


इन दिनों सावन के पवित्र महीने में हजारों कांवड़िये भी गंगोत्री धाम से गंगाजल लेकर लौट रहे हैं। लगातार बंद हो रहे मार्ग के कारण उन्हें भी भारी परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। दूसरी ओर मौसम विभाग लगातार ऑरेंज और रेड अलर्ट जारी कर रहा है तथा प्रशासन लोगों से केवल अत्यावश्यक होने पर ही घर से निकलने की अपील कर रहा है। लेकिन जिन लोगों के सामने रोज़गार, शिक्षा और इलाज जैसी मजबूरियां हैं, वे आखिर क्या करें?

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सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन स्थानों को वर्षों से भूस्खलन संभावित क्षेत्र माना जाता है, उनका स्थायी समाधान अब तक क्यों नहीं किया गया? नेताला, नालूपानी और अन्य संवेदनशील स्थानों पर हर साल करोड़ों रुपये आपदा प्रबंधन और सड़क सुरक्षा के नाम पर खर्च होने के दावे किए जाते हैं, फिर भी हर मानसून में वही तस्वीरें सामने आ जाती हैं—गिरते पत्थर, फंसे वाहन, लंबा जाम और दहशत में सफर करते लोग।


स्थानीय लोगों का कहना है कि जिन लैंडस्लाइड जोनों का स्थायी ट्रीटमेंट अब तक नहीं हुआ है, वहां तत्काल वैज्ञानिक ढंग से सुरक्षा कार्य कराया जाए, ताकि हर बारिश में लोगों की जान जोखिम में न पड़े। विकास के दावों के बीच जनता को सुरक्षित सड़कें मिलना उसका अधिकार है, कोई एहसान नहीं।

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