वतन वापसी की राह में बढ़े मदद के हाथ: इंद्रमणि के लिए अब तक जुटे ₹1.60 करोड़, फिर भी ₹1 करोड़ की जरूरत

उत्तरकाशी। सऊदी अरब में वर्षों से अपने वतन लौटने की राह देख रहे उत्तरकाशी जनपद के गाजणा पट्टी स्थित ग्राम गोरसाड़ा निवासी इंद्रमणि नौटियाल की घर वापसी के लिए अब पूरा क्षेत्र मानवता की मिसाल पेश कर रहा है। इंद्रमणि को अपने घर वापस लाने के लिए सामाजिक संगठनों, युवाओं और ग्रामीणों की ओर से लगातार आर्थिक सहयोग जुटाया जा रहा है। इस मुहिम में अब तक करीब ₹1 करोड़ 60 लाख की धनराशि एकत्रित हो चुकी है, जबकि उनकी वतन वापसी के लिए अभी भी बड़ी धनराशि की आवश्यकता है।

बताया गया कि इंद्रमणि नौटियाल वर्ष 2018 में रोजगार के सिलसिले में सऊदी अरब गए थे, जहां वह ट्रक चालक के रूप में कार्य कर रहे थे। इसी दौरान ट्रक चलाते समय वह एक सड़क दुर्घटना का शिकार हो गए। हादसे के बाद सऊदी अरब की कानूनी प्रक्रिया के तहत उन पर भारतीय मुद्रा में करीब ढाई करोड़ रुपये का अर्थदंड लगाया गया। इतनी बड़ी धनराशि जमा न कर पाने के कारण इंद्रमणि पिछले कई वर्षों से सऊदी अरब में फंसे हुए हैं और अपने परिवार से दूर हैं।
₹1.60 करोड़ जुटे, लेकिन मंजिल अभी बाकी
इंद्रमणि की घर वापसी के लिए चल रही मुहिम ने अब जनआंदोलन का रूप ले लिया है। विभिन्न

सामाजिक संगठन, युवा प्रगति मंच लोदाडा और क्षेत्र के ग्रामीण लगातार अपने स्तर से सहयोग कर रहे हैं। अब तक करीब ₹1.60 करोड़ जुटाए जा चुके हैं, लेकिन परिवार को उनकी सकुशल वतन वापसी के लिए अभी और आर्थिक सहयोग की दरकार है।
इसी क्रम में ग्राम पंचायत लोदाडा की ओर से ₹33,651 की सहयोग राशि इंद्रमणि नौटियाल के परिवार को सौंपी गई। युवा प्रगति मंच लोदाडा और समस्त ग्रामवासियों ने भी इस मानवीय मुहिम में बढ़-चढ़कर योगदान दिया।
इस पुनीत कार्य में कृष्णा सिंह राणा (सामाजिक कार्यकर्ता), सोहन बुटोला, डब्बल सिंह , गंगा सिंह , चंदन सिंह , देव सिंह , गोबर सिंह , खुशहाल सिंह  सहित अनेक सम्मानित ग्रामीणों ने सहयोग किया।
बेटी की भावुक अपील—“आपका छोटा सा सहयोग पिता को घर ला सकता है”
इंद्रमणि नौटियाल की पुत्री दीपिका नौटियाल ने सभी सहयोगियों का आभार जताते हुए समाज के लोगों से इस मुहिम में आगे आने की अपील की है। उन्होंने कहा कि उनके पिता वर्षों से अपने परिवार और देश से दूर हैं और हर एक व्यक्ति का सहयोग उनकी वतन वापसी की राह आसान कर सकता है।
परिवार को उम्मीद है कि जिस तरह अब तक समाज ने एकजुट होकर साथ दिया है, उसी तरह आगे भी लोग सहयोग के लिए आगे आएंगे और आवश्यक धनराशि जल्द पूरी हो सकेगी।
एक इंसान की घर वापसी की लड़ाई—आप भी बनें इस मुहिम का हिस्सा
इंद्रमणि की कहानी सिर्फ एक परिवार की परेशानी नहीं, बल्कि एक ऐसे भारतीय की कहानी है जो वर्षों से अपने वतन लौटने का इंतजार कर रहा है। आज जरूरत है कि समाज का हर सक्षम व्यक्ति अपनी सामर्थ्य के अनुसार इस मुहिम में सहयोग करे।
आपका ₹100, ₹500, ₹1,000 या अपनी क्षमता के अनुसार दिया गया सहयोग छोटा नहीं है। हजारों हाथ मिलकर ही एक परिवार को उसका अपना इंसान वापस दिला सकते हैं।
आइए, मानवता को जिंदा रखें।
इंद्रमणि को उनके परिवार तक पहुंचाने के इस अभियान में आप भी सहयोग करें।
क्योंकि किसी की जिंदगी में घर लौटने की उम्मीद बन जाना ही सबसे बड़ी इंसानियत है।

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