11 साल से सेवा दे रहे अतिथि शिक्षक, फिर भी असुरक्षित भविष्य सरकार से नियमितीकरण की मांग तेज

देहरादून/उत्तराखंड
संवाददाता महावीर सिंह राणा
उत्तराखंड के माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत अतिथि शिक्षक अपने भविष्य को लेकर गहरी चिंता में हैं। माध्यमिक अतिथि शिक्षक संघ उत्तराखंड ने सरकार से जल्द ठोस नीति बनाकर नियमितीकरण की मांग तेज कर दी है।
प्रदेश मीडिया प्रभारी प्रदीप सिंह असवाल ने बताया कि प्रदेश के अतिथि शिक्षक पिछले 11 वर्षों से लगातार सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन अब तक उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए कोई स्पष्ट नीति नहीं बनाई गई है। उन्होंने कहा कि शुरुआत में केवल विषय अध्यापन के लिए नियुक्त किए गए अतिथि शिक्षकों से समय के साथ कक्षाध्यापक, चुनाव ड्यूटी, प्रशिक्षण, अतिरिक्त जिम्मेदारियां और अब जनगणना कार्य तक कराए जा रहे हैं।
सबसे बड़ी नाराजगी हाल ही में सामने आए उस फैसले को लेकर है, जिसमें शीतकालीन अवकाश में कार्य कराने के बावजूद वेतन देने से इनकार किया गया, जबकि कुछ जगहों पर जारी वेतन की रिकवरी भी कर ली गई। इसे शिक्षक संघ ने “शोषण की चरम सीमा” बताया है।
आर्थिक संकट और बढ़ता असंतोष
संघ के नेताओं का कहना है कि लंबे समय से कम मानदेय में कार्य करने के चलते कई अतिथि शिक्षकों की आर्थिक स्थिति बेहद दयनीय हो चुकी है।
पूर्व प्रदेश महामंत्री दौलत जगूड़ी ने कहा कि पिछले चार वर्षों में सरकार ने न तो वेतन बढ़ाया और न ही सुरक्षित भविष्य के लिए कोई नीति बनाई। उन्होंने यह भी कहा कि अन्य राज्यों, जैसे हरियाणा, में गेस्ट टीचरों के लिए नीति बनाई जा चुकी है, जबकि उत्तराखंड में अब भी स्थिति जस की तस है।
जिलों से उठी एकजुट आवाज
प्रदेशभर के जिला अध्यक्षों ने भी अपनी नाराजगी जाहिर की—

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अनिल जुड़ियाल (देहरादून): 11 वर्षों से दुर्गम क्षेत्रों में सेवा देने के बावजूद नियमित नहीं किया जाना अन्याय है।


जितेन्द्र गौड़ (टिहरी): वेतन कटौती और असुविधाओं से शिक्षक खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं।


संदीप पोखरियाल (पौड़ी):

लंबे समय से बाहर चल रहे शिक्षकों का जल्द समायोजन जरूरी।
संजय नौटियाल (उत्तरकाशी):

योग्य शिक्षक दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
हरीश सिंह चौहान (अल्मोड़ा): 250 से अधिक प्रभावित शिक्षकों का समायोजन अब तक नहीं हुआ।
नई नियुक्तियों पर भी सवाल

अतिथि शिक्षको के लिए सपष्ट एवं ठोस नीति बनाएं, भविष्य अधर में ना लटकाए ।
प्रदीप सिंह असवाल
प्रदेश मीडिया प्रभारी

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अतिथि शिक्षक पिछले 11 वर्षो से पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ सेवा दे रहे हैं। फिर भी आज तक अस्थायी हैं। हमारी मांग सिर्फ नौकरी नहीं बल्कि सम्मान और स्थायित्व की है। हमें नियमित किया जाए।
ब्लॉक अध्यक्ष खिर्सू श्रीनगर
हाल के वर्षों में वेटिंग के माध्यम से नियुक्त हुए नए अतिथि शिक्षक भी अपने भविष्य को लेकर आशंकित हैं। उनका कहना है कि जब 11 साल से कार्यरत शिक्षकों के लिए नीति स्पष्ट नहीं है, तो उनका भविष्य भी अनिश्चित ही रहेगा।
आंदोलन की चेतावनी
अतिथि शिक्षकों ने स्पष्ट किया है कि उनकी मांग केवल नौकरी नहीं, बल्कि सम्मान और स्थायित्व की है। यदि सरकार जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाती है, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
संघ ने सरकार से मांग की है कि सभी प्रभावित अतिथि शिक्षकों का शीघ्र समायोजन, वेतन वृद्धि और नियमितीकरण की स्पष्ट नीति बनाई जाए, ताकि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों का भविष्य सुरक्षित हो सके।

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