उत्तरकाशी
रिपोर्ट महावीर सिंह राणा
देवभूमि उत्तराखंड को यूं ही नहीं कहा जाता कि यहां कण-कण में ईश्वर का वास है। हर गांव, हर परिवार और हर आंगन में आस्था की गूंज सुनाई देती है। यही जीवंत परंपरा एक बार फिर जनपद उत्तरकाशी की ग्राम पंचायत सिल्यांन और ग्राम पंचायत मांडो में देखने को मिली, जहां भक्ति, संस्कृति और सामाजिक एकता के अद्भुत दृश्य सामने आए।

गौरतलब है कि उत्तरकाशी, जहां एक ओर काशी विश्वनाथ की पवित्र नगरी के रूप में प्रसिद्ध है, वहीं गंगा और यमुना के उद्गम स्थल होने के कारण भी इसकी धार्मिक महत्ता और अधिक बढ़ जाती है। यहां के ग्रामीण जीवन में पूजा-पाठ, मेले और धार्मिक अनुष्ठान केवल परंपरा नहीं, बल्कि जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं।

सिल्यांन में भक्ति का समर्पण: ‘थोलू’ की तैयारियां
ग्राम पंचायत सिल्यांन में भगवान श्री हरि महाराज के ‘थोलू’ की तैयारियों ने श्रद्धा का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया। इस अवसर पर श्रद्धालु श्री देवी गुशाईं और श्री गणेश सेमवाल द्वारा निस्वार्थ भाव से की जा रही सेवा ने सभी को भावविभोर कर दिया। आज के व्यस्त जीवन में इस तरह का समर्पण समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन रहा है।

मांडो में भक्ति और मिलन का संगम
वहीं ग्राम पंचायत मांडो में भगवान श्री कंडार की ‘ध्यानियों’ के माध्यम से भक्ति का अलौकिक वातावरण देखने को मिला। ‘झामन’ की प्राण प्रतिष्ठा के आयोजन ने पूरे गांव को एक सूत्र में बांध दिया। इस धार्मिक आयोजन के बहाने वर्षों बाद ग्रामीणों का आपसी मिलन भी हुआ, जिसने सामाजिक रिश्तों को और मजबूत किया।

आस्था से जुड़ा संदेश
इन आयोजनों ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि समय की कमी नहीं, बल्कि प्राथमिकताओं का प्रश्न है। जब मन में सच्ची श्रद्धा हो, तो भगवान, समाज और अपनों के लिए समय स्वतः निकल आता है।
संस्कृति ही पहचान, धर्म ही एकता का आधार
उत्तरकाशी के इन गांवों में उमड़ा आस्था का सैलाब यह संदेश देता है कि हमारी संस्कृति और परंपराएं ही हमारी असली पहचान हैं। इन्हें सहेजना और आगे बढ़ाना ही सच्चे अर्थों में जनसेवा है।

