1 सितम्बर 2 सितंबर को होगा कुश कल्याण बुग्याल मेले का भव्य आयोजन,

उत्तरकाशी। देवभूमि उत्तराखंड की पहचान केवल अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के लिए ही नहीं, बल्कि यहां की पौराणिक मान्यताओं और रहस्यमयी धार्मिक स्थलों के लिए भी है। हिमालय की ऊंची चोटियों के बीच ऐसा ही एक अद्भुत स्थल है कुश कल्याण बुग्याल, जहां आगामी 1सितम्बर 2 सितंबर को भव्य मेले का आयोजन होने जा रहा है।


उत्तरकाशी से करीब 30 किलोमीटर दूर स्थित सीला गांव से होकर कुश कल्याण बुग्याल तक पहुंचने वाला यह ट्रैक प्रकृति और आस्था का अनूठा संगम है। समुद्र तल से करीब 4000 से 4500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस क्षेत्र में विशाल बुग्याल, दुर्लभ फूल-जड़ी-बूटियां, ऊंची पर्वत श्रृंखलाएं और बर्फ से ढकी चोटियां पर्यटकों को रोमांचित करती हैं।

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पौराणिक मान्यताओं के अनुसार पांडवों के स्वर्गारोहण से भी इस क्षेत्र का संबंध बताया जाता है। मान्यता है कि पांडव इसी हिमालयी क्षेत्र से होते हुए स्वर्गारोहण की यात्रा पर आगे बढ़े थे। यही वजह है कि आज भी यह क्षेत्र श्रद्धा और कौतूहल का केंद्र बना हुआ है।


कुश कल्याण बुग्याल मेले में हर वर्ष बड़ी संख्या में ग्रामीण, श्रद्धालु, पर्यटक और प्रकृति प्रेमी पहुंचते हैं। इस बार मेले को और भव्य रूप देने की तैयारी की जा रही है। आयोजन में जनप्रतिनिधियों के साथ पर्यटन विभाग की टीम की मौजूदगी भी रहेगी।

अगर आप भी हिमालय की वादियों, बुग्यालों की खूबसूरती और देवभूमि की पौराणिक परंपराओं को करीब से महसूस करना चाहते हैं, तो 1सितम्बर 2 सितंबर को शीला गांव पहुंचकर कुछ कल्याण बुग्याल मेले के साक्षी जरूर बनें।
शीला गांव तक सड़क मार्ग से पहुंचने के बाद आगे की यात्रा ट्रैकिंग के माध्यम से की जाती है। ऊंचाई और मौसम को देखते हुए यात्रियों को गर्म कपड़े, स्लीपिंग बैग और आवश्यक ट्रैकिंग सामग्री साथ रखने की सलाह दी जाती है।
ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्य ने क्षेत्रवासियों एवं पर्यटकों से अपील की है कि 1सितम्बर 2 सितंबर को शीला पहुंचें और इस ऐतिहासिक, धार्मिक एवं पर्यटन मेले का हिस्सा बनें।
तो इस बार 1 सितम्बर 2 सितंबर को चलिए…
कुछ कल्याण बुग्याल की रोमांचक यात्रा पर,
जहां आस्था भी है, रोमांच भी है और हिमालय की अद्भुत खूबसूरती भी।

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