प्रधानमंत्री का संदेश: तीर्थयात्री अपनाएं ‘पांच संकल्प’, डिजिटल उपवास का भी आह्वान

देहरादून/उत्तराखंड:
रिपोर्ट महावीर सिंह राणा
विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा के शुभारंभ के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों और श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दी हैं। केदारनाथ के कपाट खुलने के मौके पर जारी अपने संदेश में उन्होंने इस पावन यात्रा को भारत की सनातन सांस्कृतिक चेतना का भव्य उत्सव बताया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि हिमालय की गोद में बसे बद्रीनाथ धाम केदारनाथ धाम गंगोत्री धाम यमुनोत्री धाम सदियों से आस्था, विश्वास और भारतीय संस्कृति के दिव्य केंद्र रहे हैं। उन्होंने Adi Shankaracharya, Ramanujacharya और Madhvacharya के योगदान को याद करते हुए कहा कि इन यात्राओं ने भारत की सांस्कृतिक एकता को नई दिशा दी है।
विकसित भारत में उत्तराखंड की भूमिका

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प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में दोहराया कि “यह दशक उत्तराखंड का दशक है” और राज्य पर्यटन, आध्यात्मिकता व आर्थिक विकास में नए आयाम स्थापित कर रहा है। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में हुए विकास कार्यों से चारधाम यात्रा अब पहले से अधिक सुगम, सुरक्षित और दिव्य बन गई है।
📵 डिजिटल उपवास की अपील
प्रधानमंत्री ने तीर्थयात्रियों से खास अपील करते हुए कहा कि यात्रा के दौरान डिजिटल उपवास रखें और उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता को महसूस करें। इससे आध्यात्मिक अनुभव और भी गहरा होगा।
✋ प्रधानमंत्री के ‘5 संकल्प’
चारधाम यात्रा को सफल और अनुकरणीय बनाने के लिए पीएम ने श्रद्धालुओं से पांच संकल्प अपनाने का आग्रह किया—
1️⃣ स्वच्छता सर्वोपरि
धामों और नदियों की स्वच्छता बनाए रखें, सिंगल यूज प्लास्टिक से दूरी बनाएं।
2️⃣ पर्यावरण संरक्षण
हिमालय की संवेदनशीलता को समझें, ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसे प्रयासों में भाग लें।
3️⃣ सेवा और एकता
सहयात्रियों की मदद करें, देशभर से आए लोगों से जुड़कर “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” को मजबूत करें।
4️⃣ वोकल फॉर लोकल
अपने खर्च का कम से कम 5% स्थानीय उत्पादों पर खर्च करें, लोकल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दें।
5️⃣ अनुशासन और सुरक्षा
यात्रा नियमों, ट्रैफिक और प्रशासनिक निर्देशों का पालन करें, जिम्मेदार यात्री बनें।
🎥 क्रिएटर्स और युवाओं से खास अपील
प्रधानमंत्री ने कंटेंट क्रिएटर्स और इंफ्लूएंसर्स से भी आग्रह किया कि वे उत्तराखंड की लोक परंपराओं, संस्कृति और स्थानीय कहानियों को देश-दुनिया तक पहुंचाएं।

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चारधाम यात्रा 2026 न सिर्फ आस्था का पर्व है, बल्कि स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, लोकल समर्थन और राष्ट्रीय एकता का भी संदेश दे रही है। प्रधानमंत्री का यह संदेश यात्रा को एक नए दृष्टिकोण और जिम्मेदारी के साथ जोड़ता है।

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