उत्तरकाशी
रिपोर्ट-महावीर सिंह राणा
भाटवड़ी बिलोक अंतर्गत रैथल गाँव की 24साल की पूर्णिमा ने 11हजार फीट की ऊँचाई पर बसा दयारा बुग्याल में साइकिलिंग कर साहसिक पर्यटन का बड़ा संदेश दिया है।

उत्तरकाशी में पर्यटन विकास की असीम संभावनाओं को समेटे दयारा बुग्याल में रैथल की बेटी पूर्णिमा ने साइकिलिंग कर साहिसक पर्यटन की दिशा में नया कदम रखा है। पूर्णिमा ने रैथल से दयारा बुग्याल 11 हजार फीट की ऊंचाई पर साइकिलिंग कर दयारा में नई पर्यटन गतिविधियों को विकसित करने की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित किया।दरअसल, अब तक प्रसिद्ध पर्यटक स्थल दयारा बुग्याल में स्कीइंग और ट्रेकिंग जैसी पर्यटन गतिविधियों के संचालन के लिए जाना जाता है, लेकिन 24 वर्षीय रैथल गांव निवासी पूर्णिमा ने गत सप्ताह दयारा बुग्याल में साइकिलिंग कर यहां साहसिक पर्यटन की दिशा में नई पहल की है। पूर्णिमा ने दयारा के नोरी का डेरू, कुंती का सेरू से लेकर बकरिया टॉप तक करीब दस किमी एरिया में साइकिलिंग से बुग्यालों का दूरी नापी, जो कि बुग्याल क्षेत्र को नई पहचान दिलाने की दिशा में अभिनव प्रयास भी माना जा रहा है।
जिस साइकिल से उन्होंने दयारा का भ्रमण किया, उसका वजन महज साढ़े आठ किमी है, जिससे बुग्यालों को किसी प्रकार का नुकसान नहीं हुआ। इसके अलावा पूर्णिमा पैराग्लाइडिंग पर्वतारोहण के क्षेत्र में भी कदम रख चुकी है। उन्होंने हाल ही में पर्यटन गांव नटीण से पैराग्लाइडिंग कर क्षेत्र के बेटियों को हर क्षेत्र में मुकाम हासिल करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा परिवार साथ दे तो लड़कियां कोई भी मुकाम हासिल कर सकती हैं।
बता दें कि रैथल की पूर्णिमा के पिता कुंदन खेती बाड़ृी का काम करते हैं और पूर्णिमा चार भाई बहनों में सबसे छोटी हैं। उनके द्वारा साइकिलिंग,पैराग्लाइडिंग दयारा और इस क्षेत्र में साहसिक पर्यटन विकास की नई संभावना के संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है।

